शेयर बाजार में भारी दबाव: वैश्विक अनिश्चितता से सेंसेक्स 508 अंक टूटा, निवेशकों की चिंता बढ़ी

खबर सार :-
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, अमेरिका-ईरान वार्ता पर संशय और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को दबाव में ला दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में उल्लेखनीय गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, एफआईआई की गतिविधियां और तकनीकी स्तर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
शेयर बाजार में भारी दबाव: वैश्विक अनिश्चितता से सेंसेक्स 508 अंक टूटा, निवेशकों की चिंता बढ़ी
खबर विस्तार : -

Indian Stock Market Updates: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जबरदस्त दबाव देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और निवेशकों की सतर्क रणनीति के चलते बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 508.40 अंक यानी 0.68 प्रतिशत टूटकर 74,267.34 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 165.15 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,382.60 पर आ गया।

भारतीय शेयर बाजार में आज दिनभर बिकवाली का माहौल बना रहा। केवल चुनिंदा आईटी और मेटल शेयरों को छोड़ अधिकांश सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी रही बड़ी गिरावट

बाजार की कमजोरी केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 895.85 अंक यानी 1.45 प्रतिशत गिरकर 60,827.95 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 159 अंक यानी 0.99 प्रतिशत फिसलकर 17,979.80 के स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर सतर्क हैं और जोखिम कम करने के लिए छोटे एवं मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश घटा रहे हैं।

एफएमसीजी, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबार में कई प्रमुख सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी कंजम्प्शन, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी इन्फ्रा में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। वहीं बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इससे बाजार की व्यापक धारणा कमजोर बनी रही।

आईटी और मेटल शेयरों ने दिखाई मजबूती

भारतीय शेयर बाजार में आज गिरते बाजार के बीच कुछ सेक्टरों ने राहत भी दी। निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी मेटल सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, इंडिगो, एचसीएल टेक और टाटा स्टील शामिल रहे। आईटी कंपनियों को वैश्विक मांग और डॉलर की मजबूती से समर्थन मिलता दिखाई दिया। दूसरी ओर एचयूएल, आईटीसी, एनटीपीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, मारुति सुजुकी और बजाज फिनसर्व जैसे बड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।

तकनीकी स्तरों पर निवेशकों की नजर

एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह के अनुसार निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23,250-23,230 के दायरे में मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है तो सूचकांक 23,100 तक फिसल सकता है। उन्होंने बताया कि अल्पकालिक आधार पर निफ्टी के लिए 23,530-23,550 का क्षेत्र महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। वहीं बैंक निफ्टी के लिए सपोर्ट 53,200-53,100 और रेजिस्टेंस 54,000-54,100 के बीच देखा जा रहा है।

अमेरिका-ईरान अनिश्चितता बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन किसी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी सतर्कता बढ़ी है। निवेशकों को आशंका है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।

एफआईआई की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

भारतीय बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली का दबाव भी लगातार बना हुआ है। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में 21,106 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इतनी बड़ी बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और सोमवार को बाजार में कमजोरी को और बढ़ावा मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की खरीदारी वापस नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

 

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