BPCL Russia oil import: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की प्रमुख तेल कंपनी Bharat Petroleum Corporation Limited ने अपनी कच्चे तेल की आपूर्ति रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी के कुल आयात में रूस से आने वाले कच्चे तेल की हिस्सेदारी तेजी से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वृद्धि पहले की तुलना में काफी अधिक है, जब यह हिस्सेदारी 31 प्रतिशत और उससे पहले 25 प्रतिशत थी।
कंपनी के वित्त निदेशक वीआरके गुप्ता के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के बीच आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना प्राथमिकता है। इसी वजह से रूस से आयात बढ़ाया गया है और अन्य स्रोतों पर भी निर्भरता बनाए रखी गई है।
गुप्ता ने बताया कि कंपनी ने इस वित्त वर्ष में आठ नए प्रकार के कच्चे तेल को अपने आयात पोर्टफोलियो में शामिल किया है, जो चार अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से आते हैं। इसका उद्देश्य किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 तक कच्चे तेल की आपूर्ति पहले से सुरक्षित कर ली गई है, जिससे भविष्य की अनिश्चितताओं का जोखिम कम होगा।
भारत की सरकारी तेल कंपनियां रूस के साथ-साथ कंपनी अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से भी कच्चा तेल आयात कर रही है। यह रणनीति वैश्विक आपूर्ति जोखिम को संतुलित करने और लागत नियंत्रण के लिए अपनाई गई है। विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदने से कंपनी को सप्लाई चेन में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 25,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वर्ष के 20,400 करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यह निवेश रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में किया जा रहा है।
मार्च तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा 28 प्रतिशत बढ़कर 5,624.54 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह उतार-चढ़ाव वैश्विक तेल कीमतों और मांग में बदलाव को दर्शाता है। मध्य पूर्व संकट के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए बहु-स्रोत नीति पर काम कर रहा है। बीपीसीएल जैसी कंपनियां इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे देश को स्थिर आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से बढ़ती निर्भरता लागत के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इससे भू-राजनीतिक जोखिम भी जुड़े रहते हैं। इसलिए भारत की कंपनियां संतुलित रणनीति अपना रही हैं। आने वाले समय में Bharat Petroleum Corporation Limited रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए यह रणनीति महत्वपूर्ण साबित होगी। ऊर्जा बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में कंपनियां लचीली रणनीति अपनाकर जोखिम कम करेंगी और दीर्घकालिक अनुबंधों को प्राथमिकता देंगी।
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