नई दिल्ली/कैनबराः भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे के दौरान आतंकवाद को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ नहीं चल सकते, और पानी व खून एक साथ नहीं बह सकते। उनकी इस टिप्पणी को ऑस्ट्रेलिया ने पूरी तरह समर्थन दिया है, और सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख के साथ खड़े होने का संकल्प जताया।
यह बयान उस समय आया जब राजनाथ सिंह ने कैनबरा में ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस के साथ एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी। इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की, जिनमें सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और तकनीकी अनुसंधान प्रमुख रहे। बैठक में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी संक्षिप्त उपस्थिति दर्ज कराई और भारत से आए प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और अल्बनीज को उनके चुनावी विजय पर बधाई दी।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में वैश्विक समुदाय से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई की जाए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उनके इस विचार को ऑस्ट्रेलिया ने न सिर्फ साझा किया बल्कि समर्थन में खड़ा होने का भरोसा भी दिलाया।
तीन अहम रक्षा समझौते किए गए
बैठक के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौते संपन्न हुए-
1. सूचना साझा करने के लिए समझौता
2. पनडुब्बी खोज और बचाव में सहयोग का करार
3. संयुक्त स्टाफ टॉक्स की रूपरेखा तैयार करने हेतु नियमावली का निर्धारण
ये समझौते दोनों देशों के बीच सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी और रणनीतिक संवाद को और मज़बूत करेंगे।
इस दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने केसी-30ए एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर पर एफ-35 लड़ाकू विमान को हवा में ईंधन भरने का लाइव प्रदर्शन भी देखा। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वायुसेना के बढ़ते तकनीकी तालमेल का प्रतीक है। कैनबरा के संसद भवन में रक्षा मंत्री का परंपरागत और राजकीय स्वागत किया गया, जिसमें रिचर्ड मार्लेस समेत ऑस्ट्रेलियाई सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर संस्कृतिक कार्यक्रमों और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों की उपलब्धियों’’ को भी प्रदर्शित किया गया।
सुरक्षा विशेषज्ञों की माने तो राजनाथ का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम है। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सामरिक विश्वास, रक्षा उत्पादन में साझेदारी और समुद्री सुरक्षा के साझा हितों को और सुदृढ़ किया है।
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