AI युग के लिए तैयार हो शिक्षा: PM Modi ने दिया उद्योग-शोध आधारित कैंपस बनाने का मंत्र
खबर सार :-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश स्पष्ट है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था कौशल, नवाचार और तकनीक पर आधारित होगी। ऐसे में शिक्षा प्रणाली को एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और उद्योग सहयोग से जोड़ना जरूरी है। यदि विश्वविद्यालय, उद्योग और शोध संस्थान मिलकर काम करें तो भारत का युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकता है और विकसित भारत का सपना मजबूत आधार पा सकता है।
खबर विस्तार : -
PM Modi Webinar India: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को देश की शिक्षा प्रणाली को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Ai)और डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) के अनुरूप ढालने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अपने कैंपस को उद्योग सहयोग और शोध आधारित शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करें, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके।
प्रधानमंत्री ने यह बातें बजट के बाद आयोजित एक विशेष वेबिनार को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहीं। इस वेबिनार में शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत तेजी से नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, इसलिए जरूरी है कि शिक्षा प्रणाली भी इसी दिशा में विकसित हो।
उद्योग और शिक्षा के बीच बढ़े तालमेल
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। छात्रों को उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव भी मिलना चाहिए। इसके लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को ऐसे केंद्रों में बदलने की आवश्यकता है जहां रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री सहयोग एक साथ आगे बढ़ें। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक समस्याओं पर काम करने का मौका मिलेगा और वे रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि इस Webinar में होने वाली चर्चाओं से शिक्षा क्षेत्र के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार होगा, जो विकसित भारत की नींव को और मजबूत बनाएगा।

एवीजीसी (AVGC) सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर
प्रधानमंत्री ने एवीजीसी यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स सेक्टर को भविष्य के बड़े रोजगार क्षेत्र के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि भारत में इस क्षेत्र में तेजी से संभावनाएं बढ़ रही हैं और युवाओं की रचनात्मकता इस इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे अपने पाठ्यक्रमों में एवीजीसी से जुड़े कौशल को शामिल करें, ताकि युवाओं को नए डिजिटल क्रिएटिव उद्योगों में बेहतर अवसर मिल सकें।
एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप बने पाठ्यक्रम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षा प्रणाली को भी इन क्षेत्रों के अनुरूप ढालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि National Education Policy 2020 यानी नई शिक्षा नीति ऐसा आधार प्रदान करती है जिससे पाठ्यक्रम को बाजार की जरूरतों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाया जा सकता है। इसके जरिए छात्रों को भविष्य की तकनीकों और कौशल से जोड़ने का रास्ता तैयार हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली को वास्तविक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को और तेज किया जाए।

एसटीईएम (STEM) में बेटियों की बढ़ती भागीदारी
प्रधानमंत्री ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) जैसे क्षेत्रों में बेटियों की बढ़ती उपस्थिति देश के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य की तकनीकों में बेटियों को समान अवसर मिले और वे नवाचार तथा शोध के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएं।
मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम की जरूरत
प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहां युवा शोधकर्ता बिना किसी बाधा के नई सोच और प्रयोग कर सकें। उनके मुताबिक, जब संस्थान, उद्योग और शोधकर्ता मिलकर काम करेंगे तो देश में नवाचार की गति तेज होगी और भारत वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान हासिल कर सकेगा।
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