राष्ट्रीय प्रसारण दिवस 2026: 23 जुलाई से जुड़ी वो कहानी, जिसने भारत को दी नई पहचान
खबर सार :-
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस केवल रेडियो के इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उस माध्यम को सम्मान देने का दिन भी है जिसने देश को जोड़ने, जागरूक करने और संकट के समय मार्गदर्शन देने में अहम भूमिका निभाई। बदलती तकनीक के बावजूद रेडियो आज भी अपनी विश्वसनीयता, सरलता और व्यापक पहुंच के कारण जनसंचार का सशक्त माध्यम बना हुआ है।
खबर विस्तार : -
National Broadcasting Day: आज भले ही इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म सूचना और मनोरंजन के सबसे बड़े माध्यम बन चुके हों, लेकिन रेडियो की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है। देश के दूर-दराज गांवों तक खबरें, शिक्षा, खेती-किसानी की जानकारी और मनोरंजन पहुंचाने में रेडियो की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय रेडियो प्रसारण के इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव का प्रतीक है।
भारत में पहली बार संगठित और आधिकारिक रेडियो प्रसारण सेवा की शुरुआत
दरअसल, 23 जुलाई 1927 को भारत में पहली बार संगठित और आधिकारिक रेडियो प्रसारण सेवा की शुरुआत हुई थी। इसी दिन इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (आईबीसी) ने मुंबई और कोलकाता से नियमित रेडियो प्रसारण शुरू किया। यही कारण है कि हर वर्ष 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के रूप में मनाकर देश में रेडियो के योगदान को याद किया जाता है। हालांकि भारत में रेडियो की शुरुआत इससे कुछ वर्ष पहले ही हो चुकी थी। वर्ष 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब ने पहली बार रेडियो प्रसारण का प्रयोग किया था। यह एक सीमित स्तर की पहल थी, लेकिन इसी प्रयास ने भारत में प्रसारण व्यवस्था की नींव रखी। इसके बाद कोलकाता में भी रेडियो क्लब की स्थापना हुई और धीरे-धीरे रेडियो लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगा।
आसान नहीं था रेडियो सेवा का सफर
भारत में संगठित प्रसारण की शुरुआत के बाद भी रेडियो सेवा का सफर आसान नहीं था। इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और कुछ ही वर्षों में कंपनी बंद हो गई। इसके बाद 1930 में ब्रिटिश सरकार ने रेडियो प्रसारण की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली और इसका नाम इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस रखा गया। इससे देश में रेडियो प्रसारण को स्थिरता मिली और इसका विस्तार तेजी से होने लगा।

वर्ष 1936: भारतीय प्रसारण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव
वर्ष 1936 भारतीय प्रसारण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इसी वर्ष इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (AIR) कर दिया गया। इसके बाद रेडियो देशभर में सूचना और जनसंपर्क का सबसे प्रभावी माध्यम बन गया। स्वतंत्रता के बाद 1956 में इसे लोकप्रिय नाम आकाशवाणी दिया गया, जो आज भी करोड़ों भारतीयों के बीच अपनी अलग पहचान रखता है। रेडियो के इतिहास में 1957 का वर्ष भी बेहद खास माना जाता है। इसी साल विविध भारती सेवा की शुरुआत हुई। इस सेवा ने हिंदी फिल्म संगीत, नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन को घर-घर तक पहुंचाया। एक दौर ऐसा भी था जब लोग अपने पसंदीदा गीत सुनने के लिए रेडियो के सामने घंटों इंतजार किया करते थे। विविध भारती ने रेडियो को आम जनता के जीवन का अभिन्न हिस्सा बना दिया।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका
रेडियो का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस माध्यम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद रेडियो और कांग्रेस रेडियो जैसे प्रसारण माध्यमों ने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी खबरें और संदेश लोगों तक पहुंचाने का काम किया। उस समय रेडियो ने देशवासियों में जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना जगाने में बड़ी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद भी रेडियो देश के विकास का मजबूत साथी बना रहा। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, विज्ञान और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से आकाशवाणी ने करोड़ों लोगों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाई। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में, जहां लंबे समय तक संचार के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे, वहां रेडियो सबसे भरोसेमंद सूचना माध्यम साबित हुआ।

रेडियो ने खुद को आधुनिक तकनीक के अनुरूप ढाला
प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों में भी रेडियो की उपयोगिता बार-बार सामने आई है। बाढ़, चक्रवात, भूकंप या अन्य संकट के समय जब बिजली, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं, तब रेडियो लोगों तक जरूरी सूचनाएं और सरकारी निर्देश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनता है। समय के साथ रेडियो ने भी खुद को आधुनिक तकनीक के अनुरूप ढाल लिया है। आज आकाशवाणी एफएम चैनलों, डिजिटल स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के श्रोताओं तक पहुंच रही है। विभिन्न भाषाओं और बोलियों में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं। बदलती तकनीक के बावजूद रेडियो आज भी विश्वसनीय सूचना, सांस्कृतिक विरासत और जनसंचार का मजबूत माध्यम बना हुआ है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
हॉलीज पर साइबर अटैक, 27.6 लाख ग्राहकों का डेटा लीक
2026-10-19
-
iQOO Neo12 लॉन्च की तारीख कंफर्म, डिजाइन और स्पेसिफिकेशंस सामने
2026-10-19
-
Amazon Sale: सस्ते में खरीदें iPhone 16, जानें शानदार ऑफर्स और कीमत
2026-10-19
-
Poco X8 Series Comparison: X8 Power, Pro और Base Model में अंतर
2026-10-17
-
Vivo V80 ग्लोबल मार्केट में लॉन्च, जानिए फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस
2026-10-17
-
RedMagic 12 Pro+ Launch: 185Hz Screen और RGB कूलिंग के साथ पेश
2026-10-16
-
Samsung Galaxy F70 5G भारत में 18 अक्टूबर को होगा लॉन्च
2026-10-16
-
Tecno Spark 50s 5G India Launch: 16 अक्टूबर को आ रहा नया फोन
2026-10-15
-
वनवेब को स्टारलिंक से पहले मंजूरी मिले: सुनील मित्तल की मांग
2026-10-14
-
अगली कनेक्टिविटी क्रांति को दिशा दे सकता है भारत: जीएसएमए
2026-10-14
-
Realme 16 और 16T स्मार्टफोन महंगे, जानें नई कीमतें
2026-10-13
-
vivo X Fold 6 नेबुला टील भारत में लॉन्च: कीमत और फीचर्स
2026-10-12
-
Oppo के नए वाइड-स्क्रीन फोन रेनो एक्स के स्पेसिफिकेशंस लीक
2026-10-09
-
गूगल ने दुनियाभर में लॉन्च किया SynthID डिटेक्टर टूल
2026-10-08
-
21 किमी की ऊंचाई पर DRDO की बड़ी उड़ान, स्वदेशी HAPS का सफल टेस्ट
2026-10-06