NASA ने जारी कीं गैलेक्सी M-77 की अद्भुत तस्वीरें, ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ ने बढ़ाया अंतरिक्ष का रहस्य, वैज्ञानिक भी हुए हैरान
खबर सार :-
NASA द्वारा जारी गैलेक्सी M-77 की ये तस्वीरें केवल अंतरिक्ष की खूबसूरती नहीं दिखातीं, बल्कि ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की दिशा में बड़ा कदम भी हैं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की तकनीक ने ब्लैक होल, तारों के निर्माण और गैलेक्सी संरचना को नए नजरिए से देखने का मौका दिया है। डिफ्रैक्शन स्पाइक्स ने इन तस्वीरों को वैज्ञानिक और दृश्यात्मक दोनों रूपों में बेहद खास बना दिया है।
खबर विस्तार : -
NASA Galaxy M-77 Image : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक बार फिर अंतरिक्ष प्रेमियों और वैज्ञानिकों को रोमांचित कर दिया है। एजेंसी ने James Webb Space Telescope की मदद से सर्पिल गैलेक्सी Messier 77 यानी M-77 की तीन बेहद शानदार और हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में गैलेक्सी का केंद्र असाधारण रूप से चमकता दिखाई दे रहा है, जिसने पूरी गैलेक्सी को मानो रोशनी से भर दिया हो।
सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाली चीज हैं तस्वीरों में दिखाई देने वाले ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’। ये चमकदार किरणों जैसे पैटर्न वास्तव में गैलेक्सी की संरचना नहीं, बल्कि टेलीस्कोप की ऑप्टिकल डिजाइन से पैदा होने वाला एक विशेष प्रकाशीय प्रभाव हैं। हालांकि देखने में ये किसी साइंस फिक्शन फिल्म के दृश्य जैसे लगते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए इनका अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गैलेक्सी M-77 की खासियत
M-77 एक सक्रिय केंद्र वाली सर्पिल गैलेक्सी है। इसका केंद्रीय क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जावान है क्योंकि वहां मौजूद विशाल ब्लैक होल के चारों ओर गैस बेहद तेज गति से घूम रही है। इस प्रक्रिया में गैस अत्यधिक गर्म होकर भारी मात्रा में ऊर्जा और रेडिएशन उत्सर्जित करती है। यही वजह है कि गैलेक्सी का केंद्र अत्यधिक चमकदार दिखाई देता है। NASA ने तस्वीरों के साथ एक प्रेरणादायक संदेश भी साझा किया-“किसी को भी अपनी चमक कम न करने दें।” यह संदेश गैलेक्सी के चमकदार केंद्र को दर्शाने के साथ-साथ वैज्ञानिक खोज की प्रेरणा भी देता है।

पहली तस्वीर में दिखा मिड-इन्फ्रारेड का जादू
पहली तस्वीर मिड-इन्फ्रारेड व्यू में ली गई है। इसमें गैलेक्सी के केंद्र से निकलती तेज नारंगी चमक सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। तस्वीर में छह बड़ी और दो छोटी किरणें बाहर की ओर फैलती दिखाई दे रही हैं। इन्हें ही ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ कहा जाता है। गैलेक्सी की सर्पिल भुजाओं में नारंगी रंग के चमकते बुलबुले भी नजर आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये नए बने तारों के समूह यानी स्टार क्लस्टर्स हो सकते हैं। इसके अलावा पूरी गैलेक्सी में नीले रंग के धूल भरे बादल घूमते दिखाई देते हैं, जो इसे और रहस्यमयी बनाते हैं।

दूसरी तस्वीर में दिखी 6 हजार प्रकाश वर्ष लंबी संरचना
दूसरी तस्वीर नियर-इन्फ्रारेड व्यू में कैद की गई है। इसमें गैलेक्सी के केंद्र में लगभग 6 हजार प्रकाश वर्ष लंबी एक बार संरचना साफ दिखाई देती है। यह बार एक चमकदार छल्ले से घिरी हुई है, जिसे ‘स्टारबर्स्ट रिंग’ कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह वह क्षेत्र है जहां तेजी से नए तारों का निर्माण हो रहा है। तस्वीर में यहां भी केंद्र से निकलती छह लंबी चमकदार किरणें स्पष्ट दिखाई देती हैं। ये किरणें वेब टेलीस्कोप की विशेष बनावट के कारण उत्पन्न हुई हैं।

तीसरी तस्वीर बनी विज्ञान और सुंदरता का संगम
तीसरी तस्वीर मिड-इन्फ्रारेड और नियर-इन्फ्रारेड दोनों व्यू का संयोजन है। इसमें गैलेक्सी की संरचना, धूल के बादल, स्टारबर्स्ट रिंग और चमकदार केंद्र एक साथ बेहद स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह तस्वीर न केवल देखने में आकर्षक है बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के आसपास की गतिविधियों, तारों के निर्माण और गैलेक्सी की आंतरिक संरचना को समझने में मदद मिलेगी।
हबल और वेब टेलीस्कोप में क्या है अंतर?
विशेषज्ञों के अनुसार Hubble Space Telescope में चमकदार वस्तुओं के आसपास चार बिंदुओं वाला पैटर्न दिखाई देता था, जबकि जेम्स वेब टेलीस्कोप में छह बड़ी और दो छोटी किरणों वाला पैटर्न बनता है। इसका कारण दोनों टेलीस्कोप की ऑप्टिकल डिजाइन में अंतर है। वेब टेलीस्कोप की अत्याधुनिक तकनीक वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के उन हिस्सों तक देखने की क्षमता देती है, जिन्हें पहले समझना बेहद कठिन था। यही वजह है कि इसकी हर नई तस्वीर अंतरिक्ष विज्ञान में नई जानकारी जोड़ रही है।

क्या होता है डिफ्रैक्शन स्पाइक्स ?
डिफ्रैक्शन स्पाइक्स (Diffraction Spikes) अंतरिक्ष की तस्वीरों में तारों या अत्यधिक चमकीली वस्तुओं के आसपास दिखाई देने वाली चमकदार रेखाएं या किरणें होती हैं। ये वास्तविक खगोलीय संरचना नहीं, बल्कि दूरबीन की ऑप्टिकल बनावट के कारण बनने वाला प्रकाशीय प्रभाव हैं। जब किसी तारे या गैलेक्सी से आने वाला प्रकाश टेलीस्कोप के अंदर मौजूद सपोर्ट स्ट्रट्स, दर्पणों या अन्य अवरोधों से टकराता है, तो प्रकाश मुड़ जाता है। इसी प्रक्रिया को विवर्तन (Diffraction) कहा जाता है, जिससे ये स्पाइक्स बनते हैं। ये प्रभाव खासतौर पर रिफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप में दिखाई देते हैं। चमकीली वस्तु जितनी ज्यादा उज्ज्वल होती है, स्पाइक्स उतने ही स्पष्ट नजर आते हैं। उदाहरण के तौर पर James Webb Space Telescope की तस्वीरों में छह प्रमुख डिफ्रैक्शन स्पाइक्स दिखाई देते हैं, जो उसके षट्कोणीय दर्पणों और विशेष संरचना के कारण बनते हैं।
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