BHIM App में बड़ा बदलाव: अब फिंगरप्रिंट और फेस से होंगे UPI Payment, बिना पिन के 5,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन
खबर सार :-
BHIM ऐप का नया बायोमेट्रिक फीचर डिजिटल पेमेंट को तेज, आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम पहल है। इससे छोटे ट्रांजैक्शन में पिन की जरूरत खत्म होगी और यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा। साथ ही, बड़े पेमेंट के लिए पिन अनिवार्य रहने से सुरक्षा संतुलित बनी रहेगी। यह बदलाव भारत में डिजिटल भुगतान को और व्यापक बनाने में मदद करेगा।
खबर विस्तार : -
BHIM App UPI Change: डिजिटल पेमेंट को और तेज, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सहायक कंपनी एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड ने भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है। इस फीचर के जरिए अब यूजर्स 5,000 रुपए तक के यूपीआई पेमेंट को फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के माध्यम से मंजूरी दे सकेंगे। इस नई सुविधा के आने से छोटे ट्रांजैक्शन के लिए हर बार यूपीआई पिन डालने की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि गलत पिन डालने या पिन भूलने जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलेगा। खासकर उन यूजर्स के लिए यह फीचर बेहद उपयोगी साबित होगा जो दिनभर में कई छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं।
यूजर एक्सपीरियंस में बड़ा सुधार
भीम ऐप का यह अपडेट डिजिटल पेमेंट को और सहज बनाता है। अब यूजर्स अपने दोस्तों और परिवार को पैसे भेजने, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने और ऑनलाइन खरीदारी के दौरान आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के कारण पेमेंट प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज हो जाएगी, जिससे लंबी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा। यह फीचर खासकर उन लोगों के लिए मददगार है जो टेक्नोलॉजी में ज्यादा सहज नहीं हैं और सरल विकल्प चाहते हैं।

डिजिटल सुरक्षा में भी इजाफा
एनबीएसएल की एमडी और सीईओ ललिता नटराज ने कहा कि इस फीचर का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित और सुलभ बनाना है। उन्होंने बताया कि फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन के जरिए ट्रांजैक्शन कन्फर्म करने से सुरक्षा और मजबूत होती है। बायोमेट्रिक डेटा यूजर के डिवाइस में ही सुरक्षित रहता है, जिससे पिन के लीक होने या गलत इस्तेमाल की संभावना काफी कम हो जाती है। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम में भरोसा भी बढ़ेगा।
बड़े ट्रांजैक्शन पर पिन जरूरी
हालांकि, 5,000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए अभी भी यूपीआई पिन डालना अनिवार्य रहेगा। यह कदम बड़े लेनदेन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह फीचर फिलहाल उन एंड्रॉएड और iOS स्मार्टफोन्स पर उपलब्ध है जिनमें फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन की सुविधा मौजूद है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।
45 करोड़ से ज्यादा यूपीआई यूजर्स, हर साल बन रहे नए रिकॉर्ड
भारत में यूपीआई और डिजिटल पेमेंट का विस्तार अभूतपूर्व गति से हो रहा है। करोड़ों यूजर्स और लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन यह साबित करते हैं कि देश तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। तकनीकी सुधार, सुरक्षा फीचर्स और आसान उपयोग के कारण यूपीआई भविष्य में भी डिजिटल पेमेंट का सबसे मजबूत माध्यम बना रहेगा और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करेगा। भारत में डिजिटल पेमेंट का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इसका सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित यूपीआई प्लेटफॉर्म ने यूजर बेस और ट्रांजैक्शन दोनों के मामले में रिकॉर्ड स्तर हासिल कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 45 करोड़ से ज्यादा लोग यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच के चलते यह संख्या लगातार बढ़ रही है और 2026 के आखिर तक इसमें और उछाल आने की संभावना जताई जा रही है।

डिजिटल पेमेंट अपनाने वालों की संख्या भी रिकॉर्ड पर
भारत में सिर्फ यूपीआई ही नहीं, बल्कि कुल डिजिटल पेमेंट यूजर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, 50 से 60 करोड़ लोग अब डिजिटल माध्यम से पेमेंट कर रहे हैं, जिसमें यूपीआई, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और मोबाइल वॉलेट शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में कुल लेनदेन का 99% से ज्यादा हिस्सा अब डिजिटल माध्यमों से हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। 2026 में भी यूपीआई की ग्रोथ थमी नहीं है। हाल के महीनों में एक महीने में 20 बिलियन से ज्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए हैं। वहीं, रोजाना औसतन 70 करोड़ से ज्यादा पेमेंट यूपीआई के जरिए किए जा रहे हैं।
छोटे शहरों और गांवों में बढ़ी पहुंच
यूपीआई की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसका आसान और तेज होना है। अब छोटे दुकानदार, ग्रामीण क्षेत्र और छोटे शहरों के लोग भी बड़े पैमाने पर डिजिटल पेमेंट अपना रहे हैं। क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करना आम हो गया है, जिससे नकदी पर निर्भरता घट रही है।
तीन साल में यूपीआई ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड
पिछले तीन वर्षों में यूपीआई ट्रांजैक्शन में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है:
2023: लगभग 117.6 बिलियन (11,764 करोड़) ट्रांजैक्शन
2024: बढ़कर 172 बिलियन (17,200 करोड़) ट्रांजैक्शन
2025: 228 बिलियन (22,800 करोड़) ट्रांजैक्शन का ऐतिहासिक आंकड़ा
इन आंकड़ों से साफ है कि यूपीआई हर साल 30 से 45 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
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