‘Make in India’ से मजबूत हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टरः Foxconn और Tata इलेक्ट्रॉनिक्स के जरिए तेजी से बढ़ रहा एप्पल का उत्पादन
खबर सार :-
भारत में एप्पल की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार दोनों के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं। ‘मेक इन इंडिया’ और पीएलआई जैसी योजनाओं के कारण वैश्विक कंपनियां भारत को उत्पादन केंद्र के रूप में चुन रही हैं। आईफोन फैक्ट्रियों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी औद्योगिक क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई तस्वीर भी पेश कर रही है।
खबर विस्तार : -
Apple iPhone manufacturing India: भारत में एप्पल की मौजूदगी तेजी से मजबूत होती जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आईफोन उत्पादन के विस्तार ने न केवल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अहम स्थान दिलाया है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र में महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है और देश में आईफोन फैक्ट्रियों में एक लाख से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं।
मुंबई में जारी एक बयान में वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी बड़ा माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है और कई फैक्ट्रियों में आधे से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं।

मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में 1.40 लाख कर्मचारियों को रोजगार
केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत में संचालित आईफोन मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में ही एक लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि महिला कर्मचारी जटिल तकनीक वाले सेमीकंडक्टर संयंत्रों में भी अपनी दक्षता साबित कर रही हैं। यह बदलाव न केवल तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में लैंगिक संतुलन की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में एप्पल अपनी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां मुख्य रूप से फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से संचालित करता है। देश में फिलहाल आईफोन के लिए पांच प्रमुख फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। इन फैक्ट्रियों में पीक प्रोडक्शन साइकिल के दौरान करीब 1.40 लाख कर्मचारियों को रोजगार मिलता है, जिनमें लगभग 1 लाख महिलाएं शामिल हैं। इन महिला कर्मचारियों की उम्र ज्यादातर 19 से 24 वर्ष के बीच है और बड़ी संख्या में यह उनकी पहली नौकरी होती है। कंपनियां कर्मचारियों को उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने से पहले छह सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण देती हैं। यह प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क होता है और इसमें कर्मचारियों को एसेंबली लाइन से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों की जानकारी दी जाती है, ताकि वे काम की बारीकियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।

चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम
भारत में एप्पल के उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2025 में कंपनी ने भारत में अपने आईफोन उत्पादन में करीब 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इस दौरान देश में लगभग 5.5 करोड़ आईफोन यूनिट्स की असेंबली की गई, जबकि इससे पहले के वर्ष में यह आंकड़ा करीब 3.6 करोड़ यूनिट्स था। यह वृद्धि भारत को एप्पल की वैश्विक उत्पादन रणनीति में एक महत्वपूर्ण केंद्र बना रही है। विशेषज्ञों के अनुसार एप्पल चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ से बचने और सप्लाई चेन को विविध बनाने के लिए कंपनी भारत में अपने फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि एप्पल अब अपने लगभग एक चौथाई फ्लैगशिप आईफोन का निर्माण भारत में करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रति वर्ष 22 से 23 करोड़ आईफोन का उत्पादन
वैश्विक स्तर पर एप्पल हर वर्ष लगभग 22 से 23 करोड़ आईफोन का उत्पादन करता है। ऐसे में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ना देश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इसमें सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है, जिससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में भारत एप्पल के लिए चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र बन सकता है। इससे न केवल देश के निर्यात में वृद्धि होगी बल्कि तकनीकी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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