West Bengal: माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, हथियार और गोला-बारूद बरामद

खबर सार :-

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में झारखंड सीमा के पास पुलिस ने माओवादियों के कथित ठिकाने से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। सरेंडर करने वाले कैडरों से पूछताछ के बाद कार्रवाई की गई।
पुरुलिया में माओवादियों के ठिकाने से हथियार बरामद, सर्च ऑपरेशन तेज

खबर विस्तार : -

पुरुलियाः पश्चिम बंगाल पुलिस ने झारखंड सीमा के पास पुरुलिया जिले में माओवादियों के एक कथित ठिकाने पर छापेमारी कर हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर की गई। बंदवान थाना क्षेत्र के दुआर्सिनी इलाके में एक घर की तलाशी के दौरान हथियारों और गोला-बारूद से भरा बैग मिला। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने इलाके में माओवादी गतिविधियों और हथियारों के संभावित गुप्त ठिकानों का पता लगाने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

सरेंडर करने वाले माओवादियों ने दी जानकारी

पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने बताया कि हाल ही में कई माओवादी नेताओं और कैडरों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। इनमें मदन, रवि और मीरा जैसे नाम शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दुआर्सिनी इलाके में छापेमारी की। यह इलाका झारखंड सीमा के करीब स्थित है और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पुलिस ने तलाशी के दौरान हथियारों और गोला-बारूद से भरा एक बैग बरामद किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बरामद हथियारों के प्रकार, उनकी सटीक संख्या और गोला-बारूद की कुल मात्रा का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। पुलिस अब बरामद सामग्री की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियारों को वहां कब और किस उद्देश्य से रखा गया था। जांच में इन हथियारों के संभावित इस्तेमाल और माओवादी संगठन से उनके संबंधों का भी पता लगाया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस का संयुक्त अभियान

पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस ने पड़ोसी राज्य झारखंड की पुलिस के साथ मिलकर माओवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। दोनों राज्यों की पुलिस सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही है और संभावित ठिकानों की तलाशी ले रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल अगस्त और सितंबर में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), बांकुरा जिला पुलिस और झारखंड पुलिस ने संयुक्त छापेमारी तथा तलाशी अभियान चलाए थे। इन अभियानों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को महत्वपूर्ण सफलता मिली। सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने का उद्देश्य माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों का पता लगाना, हथियारों की बरामदगी करना और संगठन के बचे हुए ठिकानों की पहचान करना है। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय से सूचनाओं के आदान-प्रदान और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

माओवादी गतिविधियां हुईं कमजोर

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों के कारण इलाके में माओवादी गतिविधियां कमजोर हुई हैं। हालांकि, ताजा बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस को आशंका है कि माओवादियों ने आसपास के क्षेत्रों में अन्य स्थानों पर भी हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखे हो सकते हैं। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, संभावित गुप्त ठिकानों की पहचान करने के लिए आने वाले दिनों में भी तलाशी अभियान जारी रहेंगे। पुलिस बरामद हथियारों से जुड़े सुरागों और पूछताछ में सामने आई जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है। पिछले वर्ष जनवरी में झारखंड पुलिस के एक बड़े अभियान के दौरान 15 माओवादियों के मारे जाने की जानकारी भी सामने आई थी। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अभियान चला रही हैं।

असीम मंडल की गिरफ्तारी से भी लगा था बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल में माओवाद विरोधी अभियान के दौरान पिछले महीने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई थी। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेता असीम मंडल को गिरफ्तार किया था। उसे आकाश, तिमिर और मनोज जैसे नामों से भी जाना जाता है। बताया गया कि मंडल पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में सक्रिय माओवादी नेताओं में शामिल था और सुरक्षा एजेंसियों की वांछित सूची में था। उसकी गिरफ्तारी पूर्वी मिदनापुर जिले के पटाशपुर इलाके में सुबह-सुबह चलाए गए अभियान के दौरान हुई। उसकी गिरफ्तारी में मददगार जानकारी देने के लिए कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किए जाने की बात सामने आई थी। इसमें झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार की ओर से 1.20 करोड़ रुपये का इनाम शामिल था।

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