लखनऊ : यूपी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के वाहन प्रदूषण जांच केंद्र पुरानी मशीनों से प्रदूषण की जांच कर रहे हैं। प्रदूषण जांच केंद्रों की मशीनें ही नहीं, उनके साफ्टवेयर में गुजरे जमाने के हैं। इन जांच केंद्रों से वाहन स्वामियों को नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट मिल तो जा रहा है, लेकिन सड़कों पर अनफिट वाहन वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर परिवहन विभाग ने नया फैसला लिया है। इसके तहत आगामी दिनों में गाड़ियों के प्रदूषण की जांच अपडेटेड साफ्टवेयर से होगी।
परिवहन विभाग की ओर से प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। साथ ही पॉल्यूशन साफ्टवेयर को वाहन साफ्टवेयर से इंटीग्रेट भी किया जाएगा। गत दिनों ही यूपी परिवहन समेत देश भर के ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों ने वाहनों के पॉल्यूशन सर्टिफिकेट को लेकर वर्चुअल बैठक की थी। बैठक में यूपी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी किए जाने की व्यवस्था के विषय में बताया गया।
यूपी में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र संचालक ही सर्टिफिकेट जारी करते हैं। संचालक मशीनों से रीडिंग लेते हैं और मानक सही होने पर सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं। वर्तमान व्यवस्था और प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों द्वारा ही सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर सवाल खड़े किए। बैठक में केरल के अफसरों ने राज्य में लागू की गई व्यवस्था की जानकारी दी गई। इस व्यवस्था को यूपी में भी लागू करने पर सहमति बनी।
केरल प्रांत में पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने के अपडेटेड साफ्टवेयर के साथ नई मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां पर रीडिंग लेने का काम संचालकों का है और इसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग को भेजी जाती है। विभाग की ओर से तय मानकों के दायरे में आने वाले वाहनों का ही पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। जिसके बाद तय किया गया कि केरल के विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने के लिए यूपी आएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रदूषण जांच केंद्रों के लिए नियम जारी किए जाएंगे।
केरल से आने वाली टीम प्रदूषण जांच केंद्रों की मशीनों और साफ्टवेयर की भी जांच करेगी। साथ ही साफ्टवेयर को अपडेट भी किया जाएगा। प्रदूषण जांच केंद्र सिर्फ पॉल्यूशन की रिपोर्ट परिवहन विभाग को भेजेंगे। पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने की नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही केरल की टीम संभागीय निरीक्षकों को भी प्रशिक्षण देगी।
रोजाना प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के संभागीय निरीक्षक बुलाए जाएंगे और प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों के साथ प्रशिक्षण दिया जाएगा। परिवहन विभाग के अफसरों ने बताया कि राजधानी समेत अन्य जनपदों के कई प्रदूषण जांच केंद्रों द्वारा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों का भी प्रदूषण सर्टिफिकेब्ट जारी करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों को लेकर व्यवस्था में बदलाव करने की कवायद शुरू की गई है।
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