लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए शुक्रवार को कई चिकित्साधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की। लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने, प्रशासनिक लापरवाही, निजी अस्पतालों के पंजीकरण में अनियमितता तथा मरीजों के इलाज में कोताही बरतने के आरोपों में पांच चिकित्साधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) समेत 16 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ और सरकारी जिम्मेदारियों में लापरवाही किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम लगातार जारी रहेंगे।
सेवा से बर्खास्त किए गए चिकित्साधिकारियों में गोरखपुर जिला चिकित्सालय की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर के डॉ. रामजी भरद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा तथा औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल हैं। इन सभी पर लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने और चिकित्सकीय कार्यों में लापरवाही बरतने के आरोप थे।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई का सबसे बड़ा असर अंबेडकरनगर में देखने को मिला। यहां सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा पर निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण व नवीनीकरण में अनियमितता, शासनादेशों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध पाए गए। एडीएम स्तर की तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
हरदोई के संडीला में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने और अपने दायित्वों में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। इस मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं प्रयागराज के मेजा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण में विफल रहने के आरोप में विभागीय कार्रवाई के साथ स्थानांतरण के आदेश दिए गए हैं।
सुल्तानपुर के लंभुआ सीएचसी में महिला मरीज के इलाज में लापरवाही के मामले में तत्कालीन अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह, चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मराज और फार्मासिस्ट अवधनारायण के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी हुए हैं। मथुरा जिला चिकित्सालय में मेडिकल परीक्षण में कथित अनियमितता को लेकर इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. देवेंद्र कुमार और सर्जन डॉ. विकास मिश्रा पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा कई जिलों के चिकित्साधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने और परिनिंदा दंड देने के आदेश भी जारी किए गए हैं। हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि पर प्रसूताओं से अवैध वसूली और अभद्रता के आरोप में तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। झांसी के ट्रॉमा सेंटर में तैनात आर्थो सर्जन डॉ. पवन साहू पर निजी प्रैक्टिस के आरोप सिद्ध होने पर कार्रवाई की गई है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और मरीजों के हितों से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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