बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, पूर्वांचल के सियासी गलियारे में पसरा सन्नाटा
खबर सार :-
रसड़ा से बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके जाने से उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है। पढ़ें पूरी खबर।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता और बलिया जिले की रसड़ा सीट से लगातार तीन बार के विधायक उमाशंकर सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार की शाम लंबी बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते पूरे पूर्वांचल समेत प्रदेश के सियासी हलके में शोक की लहर दौड़ गई।विधायक लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ रहे थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके असमय चले जाने से जहां रसड़ा और बलिया के लोगों ने अपना एक चहेता जननेता खो दिया है, वहीं उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का गणित भी पूरी तरह बदल गया है। उमाशंकर सिंह का निधन केवल एक दल की क्षति नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल की उस जमीन का नुकसान है जहां वे हर वर्ग के सुख-दुख में मुस्तैदी से खड़े रहते थे।
यूपी विधानसभा में शून्य हुआ बसपा का प्रतिनिधित्व
उमाशंकर सिंह के जाने के साथ ही सूबे की राजनीति में एक ऐतिहासिक और राजनीतिक मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी का अब कोई भी प्रतिनिधि नहीं बचा है।2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब पूरे प्रदेश में बसपा की लहर कमजोर पड़ गई थी, तब भी उमाशंकर सिंह ने रसड़ा सीट पर अपनी साख बचाकर रखी थी। वे बसपा के टिकट पर जीतकर आने वाले इकलौते उम्मीदवार थे। सदन में वे अकेले ही अपनी पार्टी की आवाज मजबूती से उठाते थे और इसी राजनीतिक निष्ठा को देखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती ने उन्हें बसपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया था। लेकिन उमाशंकर सिंह का निधन होने के बाद अब सदन के भीतर नीली टोपी और बसपा का झंडा उठाने वाला फिलहाल कोई चेहरा नहीं रह गया है।
गांव के गलियारे से शुरू हुआ सफर और बने रसड़ा का सिरमौर
बलिया जिले के नगरा ब्लॉक स्थित खनवर गांव के रहने वाले उमाशंकर सिंह का राजनीतिक और सामाजिक सफर काफी संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने जमीनी स्तर से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी।
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2012 का चुनाव: पहली बार बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह पर रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरे और भारी मतों से जीतकर पहली बार लखनऊ की विधानसभा पहुंचे।
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2017 का चुनाव: मोदी लहर के बावजूद उन्होंने अपनी जमीनी पकड़ के दम पर इस सीट पर दोबारा परचम फहराया।
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2022 का चुनाव: विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे।
हालांकि, उनके राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव भी आए। लाभ के पद से जुड़े एक मामले में एक समय उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट आ गया था और सदस्यता रद्द भी हुई, लेकिन कानून और अदालत के रास्ते उन्होंने अपनी लड़ाई लड़ी और दोबारा अपनी सदस्यता बहाल कराने में सफलता हासिल की। यह घटना उनके राजनीतिक दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
जनसेवा और गरीब कन्याओं के विवाह से बनाई दिल में जगह
राजनीति से इतर उमाशंकर सिंह की पहचान एक समाजसेवी और बेहद संवेदनशील इंसान के रूप में होती थी। अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वे गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। वे हर साल बड़े पैमाने पर गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह आयोजित कराते थे। शुरुआत में उन्होंने 251 गरीब बेटियों के हाथ पीले करवाए, जिसके बाद यह सिलसिला बढ़ता गया और बाद में उन्होंने 351 जोड़ों का एक साथ भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया। इस पहल ने उन्हें न केवल बलिया बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में एक अलग और सम्मानजनक पहचान दिलाई। क्षेत्र के लोग उन्हें सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि अपने परिवार के अभिभावक के रूप में देखते थे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनके व्यक्तिगत प्रयास हमेशा याद किए जाएंगे।
दलीय सीमाओं से परे नेताओं ने जताया शोक
उमाशंकर सिंह का निधन की खबर मिलते ही दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए लिखा कि बलिया के रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने विश्वासपात्र नेता के जाने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर जी ने हमेशा पार्टी के सिद्धांतों और अपने क्षेत्र की जनता के हितों के लिए काम किया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
रसड़ा में पसरा सन्नाटा, समर्थकों की आंखें नम
जैसे ही विधायक के निधन की आधिकारिक पुष्टि हुई, रसड़ा और उनके पैतृक गांव खनवर में मातम छा गया। बाजार बंद होने लगे और लोग एक-दूसरे से खबर की पुष्टि करने में जुट गए। उनके आवास पर समर्थकों और स्थानीय नागरिकों का तांता लगना शुरू हो गया है। हर कोई अपने प्रिय विधायक की अंतिम झलक पाने और श्रद्धांजलि देने के लिए व्याकुल नजर आया। पूर्वांचल की राजनीति में उमाशंकर सिंह का निधन एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भर पाना निकट भविष्य में बहुजन समाज पार्टी और वहां के स्थानीय सियासत के लिए आसान नहीं होगा। वे अपनी क्षेत्रवादी और जनाधार वाली राजनीति के लिए लंबे समय तक याद किए जाएंगे।
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