उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ में 100 साल पुराना जर्जर मकान ढहा, मासूमों समेत एक ही परिवार के 6 लोगों की दर्दनाक मौत, एक जिंदा बचा

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में लगातार बारिश के चलते 100 साल पुराना जर्जर मकान ढहा। इस दर्दनाक प्रतापगढ़ मकान हादसा में मासूम बच्चों समेत एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक जिंदा बचा है। पढ़ें विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट।
प्रतापगढ़ में जर्जर छत गिरने से उजड़ गया एक पूरा परिवार

खबर विस्तार : -

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। शहर के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित महुली मोहल्ले में देर रात करीब दो बजे एक सदी पुराना जर्जर मकान भरभराकर ढह गया। इस भीषण हादसे के वक्त परिवार के सभी सदस्य कमरे में गहरी नींद में सो रहे थे। देखते ही देखते हंसता-खेलता परिवार मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। इस भीषण प्रतापगढ़ मकान हादसा में दो अबोध मासूम बच्चों समेत परिवार के 6 लोगों की मौके पर ही दम घुटने और मलबे में दबने से मौत हो गई। वहीं किस्मत से परिवार का एक 22 वर्षीय युवक सुरक्षित बाहर निकल आया, जिसे गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। रात के सन्नाटे में हुई इस अनहोनी ने न केवल महुली मोहल्ले बल्कि पूरे प्रतापगढ़ जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है। घटना के बाद से ही क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है और पड़ोसियों के आंसुओं का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा? जानिए आधी रात की पूरी आपबीती

गंभीर रूप से छिटपुट चोटों के शिकार हुए और किसी तरह मौत के मुंह से निकलकर आए अमन श्रीवास्तव ने बताया कि रात में काफी उमस थी, जिसके चलते परिवार के सभी सात सदस्य एक ही कमरे में एयर कंडीशनर (AC) चलाकर सो रहे थे। बाहर रिमझिम बारिश हो रही थी। करीब दो बजे अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई और ऊपर की जर्जर मंजिल की छत सीधे नीचे आकर गिर पड़ी।

मलबे के नीचे दबे अमन ने बताया, "जब अचानक मेरी नींद खुली तो मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। चारों तरफ सिर्फ अंधेरा, धूल और भारी पत्थरों का बोझ था। मुझे एहसास हुआ कि मैं किसी बड़े मलबे के नीचे दबा हुआ हूं। मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई, हाथ-पैर मारकर खुद को बाहर निकाला। फिर मैंने अपनों की आवाज लगाने की कोशिश की, पर वहां कोई जवाब नहीं मिल रहा था। मैंने अकेले ही मलबा हटाने का प्रयास किया, लेकिन पत्थरों का वजन बहुत अधिक था। जब कुछ न बन पड़ा, तो मैं बदहवास होकर बाहर की ओर भागा और चीख-चीखकर पड़ोसियों को आवाज दी।"

चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। पड़ोसन पूनम श्रीवास्तव ने नम आंखों से बताया कि आवाज इतनी तेज थी कि लगा जैसे कोई भूकंप आ गया हो। जब लोग भागकर पहुंचे तो देखा कि घर की ऊपर की मंजिल का पूरा मलबा नीचे कमरे में समा चुका था और अंदर दबे लोग मदद के लिए पुकार भी नहीं पा रहे थे।

पुलिस और राहत बचाव दल ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की भनक लगते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। खबर मिलते ही सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा भारी पुलिस बल और फायर ब्रिगेड की टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और राहत टीमों ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के बड़े-बड़े टुकड़ों को हटाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों की मशक्कत के बाद मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकाला जा सका और आनन-फानन में एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि रात करीब दो बजे नगर कोतवाली को सूचना मिली थी कि महुली क्षेत्र में एक पुराने मकान की छत ढह गई है। प्रमोद श्रीवास्तव और उनका परिवार इसके नीचे दब गया था। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तत्काल पहुंचकर रेस्क्यू चलाया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक युवक अमन को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती कर लिया गया है।

दो मासूमों समेत इन 6 सदस्यों की गई जान

इस भयावह प्रतापगढ़ मकान हादसा में जान गंवाने वाले सभी लोग एक ही परिवार के थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • प्रमोद श्रीवास्तव (उम्र 60 वर्ष) - गृहस्वामी
  • रीता श्रीवास्तव (उम्र 55 वर्ष) - प्रमोद श्रीवास्तव की पत्नी
  • नितिन श्रीवास्तव (उम्र 25 वर्ष) - प्रमोद के छोटे बेटे
  • माधुरी श्रीवास्तव (उम्र 23 वर्ष) - नितिन की पत्नी
  • माधव (उम्र 1 वर्ष) - नितिन और माधुरी का बड़ा बेटा
  •  अद्विक (उम्र 10 महीने) - नितिन और माधुरी का छोटा बेटा

महज 10 महीने और 1 साल के दो मासूम बच्चों की मौत की खबर ने हर किसी का कलेजा छलनी कर दिया है। एक ही झटके में पूरी की पूरी पीढ़ी खत्म हो गई। हादसे में केवल अमन श्रीवास्तव ही जीवित बचे हैं, जिनके सिर से माता-पिता, भाई, भाभी और भतीजों का साया उठ गया है।

प्रशासनिक लापरवाही और पुराने जर्जर मकानों पर उठे सवाल

इस भीषण प्रतापगढ़ मकान हादसा के बाद अब स्थानीय प्रशासन और पुराने निर्माणों की स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं। महुली और आसपास के कई पुराने मोहल्लों में सैकड़ों साल पुरानी इमारतें खड़ी हैं, जो बारिश के मौसम में बेहद जोखिमभरी हो जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से दीवारों में नमी आ गई थी। 100 साल पुराना यह ढांचा पानी के भारी दबाव को झेल नहीं सका। इस मकान हादसा ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के लिए भी चेतावनी जारी कर दी है कि बारिश के सीजन से पहले ऐसे खतरनाक और जर्जर भवनों को चिह्नित कर खाली कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मकान हादसा को दोहराने से रोका जा सके।फिलहाल, जिला प्रशासन ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पीड़ित अमन श्रीवास्तव को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। पूरा इलाका इस समय गमगीन है और हर जुबान पर बस इसी त्रासदी की चर्चा है।

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