annapurna bhandar form : मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला, धार्मिक स्थलों और स्कूलों के पास नहीं खुलेंगी शराब की दुकानें, 5 रुपये में मिलेगा मछली-चावल
खबर सार :-
annapurna bhandar form : पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं लागू करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंदिरों और शिक्षण संस्थानों के 1 किमी के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही 5 रुपये में मछली-चावल और महिलाओं को ₹3000 मासिक देने की अन्नपूर्णा भंडार योजना की बड़ी घोषणा की है।
खबर विस्तार : -
annapurna bhandar form : पश्चिम बंगाल की बागडोर संभालते ही भारतीय जनता पार्टी की पहली सरकार ने राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सूबे के नवविर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक बेहद संवेदनशील और युगांतकारी निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि राज्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान और मंदिर के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के इस अप्रत्याशित कदम को राज्य में कानून व्यवस्था दुरुस्त करने और सामाजिक माहौल को पवित्र बनाए रखने की दिशा में एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनहित से जुड़ी कई कल्याणकारी योजनाओं का खाका खींचते हुए राज्य भर की 400 कैंटीनों में मात्र 5 रुपये में 'माछ-भात' (मछली और चावल) उपलब्ध कराने का भी ऐलान किया है।
annapurna bhandar form : प्रशासनिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के कड़े तेवर
सत्ता संभालने के मात्र तीन सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का यह रूप उनके कड़े प्रशासनिक संकल्प को दर्शाता है। नादिया जिले के कल्याणी इलाके में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान यह तमाम बड़े फैसले लिए गए। यह महत्वपूर्ण बैठक लगभग दो घंटे तक चली, जिसमें नादिया, उत्तर 24 परगना और हुगली जिलों के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों के आसपास का माहौल पूरी तरह अनुशासित होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं केवल कागजों पर नहीं दिखनी चाहिए, बल्कि उनका धरातल पर क्रियान्वयन तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित होना चाहिए। इसी कड़ी में शराब की दुकानों को एक किलोमीटर दूर शिफ्ट करने का आदेश जारी किया गया है, ताकि युवाओं और धार्मिक भावनाओं पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोका जा सके।
अन्नपूर्णा भंडार योजना से महिलाओं को मिलेगी आर्थिक ताकत
चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बहुप्रतीक्षित 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' का काम बुधवार यानी 27 मई से विधिवत रूप से शुरू होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये का प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डीबीटी) लाभ दिया जाएगा। यह कदम पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के स्थान पर लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। राज्य सचिवालय 'नबान्न' से बुधवार को विभागीय मंत्री अग्निमित्रा पॉल की मौजूदगी में इस योजना के आधिकारिक फॉर्म जारी कर दिए जाएंगे।
फर्जी लाभार्थियों पर कसता शिकंजा: केवल भारतीयों को ही मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस वार्ता में सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि इस योजना का लाभ उठाने का अधिकार केवल और केवल भारतीय नागरिकों को ही होगा। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "बाहर से आने वाले किसी भी बांग्लादेशी नागरिक को इन सरकारी योजनाओं का लाभ कतई नहीं दिया जाएगा।" सरकार का मानना है कि इससे राज्य के संसाधनों पर अवैध प्रवासियों का दबाव कम होगा और वास्तविक हकदार नागरिकों को उनका पूरा अधिकार मिल सकेगा। उन्होंने प्रशासन को फॉर्मों की स्क्रूटनी के दौरान कड़े सत्यापन और पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश न बचे। इसके तहत पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं केवल वैध निवासियों तक ही सीमित रहेंगी।
सरकारी बसों में मुफ्त सफर और स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण
महिलाओं के कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों को और विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी 1 जून से राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इस व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सरकार विशेष कार्ड जारी करेगी, जिससे यात्रा के दौरान किसी भी महिला को असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जब तक सरकार की यह कल्याणकारी नीतियां पूरी तरह लागू नहीं हो जातीं, तब तक पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की लक्ष्मी भंडार और स्वास्थ्य साथी योजनाएं चलती रहेंगी, ताकि जनता को कोई परेशानी न हो। हालांकि, आने वाले समय में स्वास्थ्य साथी योजना को केंद्र सरकार की समानांतर योजना 'आयुष्मान भारत' में पूरी तरह समाहित कर दिया जाएगा, जिससे राज्य के नागरिकों को देश भर के बड़े अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सके। यह बदलाव भी पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं लागू करने की वृहद् नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
400 मां कैंटीनों में अब मिलेगा 'माछ-भात'
गरीब और श्रमिक वर्ग को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में चल रही लगभग 400 'मां कैंटीन' के ढांचे को और मजबूत किया जाएगा। अब इन कैंटीनों में हफ्ते में दो दिन मात्र 5 रुपये की दर पर मछली और चावल (माछ-भात) परोसा जाएगा। सत्ता परिवर्तन के बाद इन कैंटीनों के भविष्य को लेकर जो अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे, उन्हें सरकार ने पूरी तरह साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि नई सरकार पुरानी कल्याणकारी योजनाओं को बंद करने के बजाय उन्हें नए कलेवर, अधिक पोषण और बेहतर पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाएगा।
जमीनी स्तर पर जुटे सरकारी अधिकारी और विधायक
इस पूरी योजना को मिशन मोड में लागू करने के लिए सरकार ने जनप्रतिनिधियों को भी मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों से उपलब्ध कराए जाएंगे। इस काम में तेजी लाने के लिए सभी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय विधायक सक्रिय रूप से भाग लेंगे ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को फॉर्म भरने में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा, "आप जितनी जल्दी पंजीकरण फॉर्म भरेंगे, उतनी ही तेजी से हम आपके खातों में सहायता राशि भेजने की प्रक्रिया को पूरा कर पाएंगे।"
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई दो घंटे की इस सघन बैठक में मानसून से पहले के आवश्यक कार्यों और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष चर्चा हुई। सरकार का मुख्य ध्यान स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए प्री-मानसून तैयारियों को समय से पूरा करने पर है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर जिस तरह की तेजी और निर्णय क्षमता दिखाई दे रही है, उससे साफ है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य एक नए प्रशासनिक युग की ओर कदम बढ़ा चुका है, जहां विकास और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय एक साथ देखने को मिल रहा है और पश्चिम बंगाल में नई योजनाएं धरातल पर बदलाव ला रही हैं।
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