साधकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया

खबर सार :-

परमार्थ निकेतन में मंगलवार से वेदान्त योग कोर्स का शुभारम्भ किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए योग, ध्यान, अध्यात्म के जिज्ञासुओं ने इसमें भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
साधकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया

खबर विस्तार : -

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में मंगलवार से वेदान्त योग कोर्स का शुभारम्भ किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए योग, ध्यान, अध्यात्म के जिज्ञासुओं ने इसमें भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि वेदान्त मनुष्य को उसकी आंतरिक चेतना का बोध कराता है, जबकि योग स्वयं के भीतर की यात्रा का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज तनाव प्रबंधन से अधिक आवश्यकता आत्म-प्रबंधन की है। व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और जीवनशैली में संतुलन स्थापित करता है तो तनाव स्वतः कम होने लगता है।

उन्होंने कहा कि योग को केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे जीवन के प्रत्येक विचार, व्यवहार और कर्म में उतारना चाहिए। उनके अनुसार सच्चा योग वही है, जिसमें शांति, करुणा, अनुशासन और सेवा का भाव हो। कार्यक्रम के दौरान साधकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वृक्षारोपण आने वाली पीढियों के लिए जिम्मेदारी और जीवन का उपहार है। कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को योग विज्ञान, ध्यान, भारतीय दर्शन, वेदान्त और संतुलित जीवन से जुडे विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योगाचार्य गायत्री ने बताया कि भारत के अलावा अनेक देशों से आए प्रतिभागी योग के साथ भारतीय दर्शन, वेदान्त और अध्यात्म को जानने एवं जीवन में अपनाने के प्रति उत्सुक हैं।

वेदांत कोर्स क्या है

वेदांत कोर्स एक पारंपरिक और आध्यात्मिक पाठ्यक्रम है, जो शारीरिक आसनों के साथ-साथ उपनिषदों, भगवद्गीता और योग सूत्रों जैसे प्राचीन ग्रंथों का गहन अध्ययन कराता है। इसका उद्देश्य छात्रों को मानसिक शांति, आंतरिक ज्ञान और मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। यह कोर्स मुख्य रूप से पारंपरिक आश्रमों और योग संस्थानों द्वारा संचालित किया जाता है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित विषय पढाए जाते हैं। कोर्स में सैद्धांतिक और दार्शनिक ज्ञान वेदांत दर्शन के अंतर्गत कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग और राज योग का अध्ययन किया जाता है। व्यावहारिक अभ्यास में हठ योग प्राणायाम, ध्यान, और मंत्रोच्चार का अध्ययन होता है। जीवन शैली में सात्विक आहार और सादा जीवन जीने की कला सीखने का अवसर मिलता है।

योग शिक्षक बनने में मदद मिलती 

यह कोर्स उन सभी साधकों, छात्रों या कामकाजी लोगों के लिए उपयुक्त है जो अपने आध्यात्मिक विकास को गहरा करना चाहते हैं या एक प्रमाणित योग शिक्षक बनना चाहते हैं। संस्थानों के आधार पर यह कोर्स विभिन्न अवधियों में उपलब्ध होते हैं। प्रारंभिक पाठ्यक्रम आमतौर पर 1 से 2 महीने का होता है। टीचर ट्रेनिंग कोर्स 200 घंटे का प्रशिक्षण होता है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र मिलता है। 

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