नई दिल्ली: भारतीय नौसेना अपनी बहुप्रतीक्षित ‘कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 2026’ का पहला संस्करण 14 से 16 अप्रैल के बीच नई दिल्ली में आयोजित करने जा रही है। यह तीन दिवसीय उच्चस्तरीय सम्मेलन नौसेना भवन में होगा, जिसमें नौसेना प्रमुख, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस अहम बैठक का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, परिचालन तैयारियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक दिशा तय करना है।
नौसेना के अनुसार, सम्मेलन के दौरान वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों का गहन विश्लेषण किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर बढ़ती सामरिक चुनौतियों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा होगी। भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है, ऐसे में इन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारतीय नौसेना की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है।
इस सम्मेलन में ‘ब्लू-वॉटर’ क्षमताओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके तहत लंबी दूरी तक संचालन करने की क्षमता, आधुनिक युद्धक प्लेटफॉर्म्स, उन्नत प्रशिक्षण और टिकाऊ रखरखाव प्रणाली जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही, बिना चालक वाले सिस्टम्स (Unmanned Systems) और उन्नत तकनीकों के उपयोग को और प्रभावी बनाने की रणनीतियों की समीक्षा की जाएगी।
यह सम्मेलन ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित हो रहा है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। इस संदर्भ में नौसेना की ऑपरेशनल सिद्धांतों की पुनः पुष्टि, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और तकनीक-आधारित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सम्मेलन में त्वरित तैनाती, समुद्री निगरानी और संकट के समय समन्वित प्रतिक्रिया को लेकर भी रणनीतियां बनाई जा सकती हैं।
सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और गृह सचिव की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इनके साथ विचार-विमर्श के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा जाएगा। यह मंच तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, संयुक्त संचालन और रणनीतिक समन्वय को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, यह राष्ट्रीय नेतृत्व और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच संवाद को भी सुदृढ़ करेगा।
तकनीकी दृष्टि से यह सम्मेलन काफी अहम माना जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधानों और डेटा-ड्रिवन तकनीकों के उपयोग पर विशेष फोकस रहेगा। नौसेना के संचालन में इन तकनीकों को शामिल करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया, निगरानी प्रणाली और मिशन की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
इसके अलावा, सम्मेलन में स्वदेशीकरण, नवाचार और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के प्रयासों पर भी विचार किया जाएगा। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों और तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत की सामरिक क्षमता और मजबूत हो सके।
व्यापक स्तर पर यह सम्मेलन भारतीय समुद्री सिद्धांत के अनुरूप नौसेना की चार प्रमुख भूमिकाओं—सैन्य, कूटनीतिक, पुलिसिंग और मानवीय—की समीक्षा करेगा। साथ ही, ‘म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी अक्रॉस रीजन’ (MAHASAGAR) विजन को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और बहुराष्ट्रीय बलों की सक्रियता के बीच यह सम्मेलन भारतीय नौसेना की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। ऐसे समय में जब समुद्री सुरक्षा वैश्विक स्थिरता का प्रमुख आधार बन चुकी है, यह सम्मेलन भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
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