नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय ब्रिटेन यात्रा ने भारत-ब्रिटेन संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए “गेम चेंजर” माना जा रहा है, जो व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता करीब तीन वर्षों की गहन बातचीत और 14 दौर की वार्ताओं के बाद संभव हुआ है। इसके तहत दोनों देश सैकड़ों वस्तुओं और सेवाओं पर आयात शुल्क या टैक्स में छूट देंगे, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और कीमतों में कमी आएगी। भारतीय व्यापारिक हितों की बात करें तो अब भारत से चमड़ा, रेडीमेड वस्त्र, जूते, आभूषण, चाय और मसालों का निर्यात बिना भारी शुल्क के किया जा सकेगा। वहीं, ब्रिटेन से आयात होने वाले प्रीमियम उत्पाद जैसे कि स्कॉच व्हिस्की, लक्ज़री गाड़ियां और उच्च तकनीक वाली मशीनें भारतीय बाज़ार में सस्ती होंगी।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस करार को “ब्रिटेन के लिए आर्थिक पुनर्जागरण का माध्यम” बताया और कहा कि इससे देश में हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ एक ऐसे रिश्ते में प्रवेश कर रहे हैं जो नवाचार, शिक्षा और सतत विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता हमारे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ दृष्टिकोण को सशक्त करेगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।”
यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने बर्किंघम पैलेस में किंग चार्ल्स तृतीय से भी शिष्टाचार भेंट की, जहां दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए। इस ऐतिहासिक करार को अब ब्रिटिश संसद की मंजूरी का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को एक मजबूत वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
एफटीए दो देशों के बीच कारोबार को आसान बनाने वाला करार है। इसके तहत दोन देश एक-दूसरे के प्रोडक्ट्स पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी, टैरिफ या टैक्स को कम करते हैं या खत्म करते हैं। भारत और यूके के बीच FTA को लेकर तीन साल से बात चल रही थी। इस समझौते से चमड़े, जूते और कपड़ों का कम दरों पर एक्सपोर्ट संभव होगा, जबकि ब्रिटेन से व्हिस्की और कारों का इंपोर्ट सस्ता हो जाएगा। बता दें, मोदी कैबिनेट ने बुधवार को एफटीए को मंजूरी दी थी। इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद इसे ब्रिटिश संसद से मंजूरी लेनी होगी, जिसके बाद यह समझौता लागू होगा।
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