भोजशाला में नई गाइडलाइन लागू, मां वाग्देवी मंदिर के रूप में शुरू हुई पूजा-अर्चना

खबर सार :-
भोजशाला परिसर के भीतर, पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की रस्में शुरू हो गई हैं। इस समारोह के दौरान सदियों पुरानी परंपरा को निभाते हुए परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर से 'अखंड ज्योति' को भीतर लाया गया और गर्भगृह में स्थापित किया गया। अब भोजशाला को एक भव्य और पुनर्जीवित रूप में विकसित करने के लिए व्यापक तैयारियां चल रही हैं।

भोजशाला में नई गाइडलाइन लागू, मां वाग्देवी मंदिर के रूप में शुरू हुई पूजा-अर्चना
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भोपालः मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रविवार को एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। नई व्यवस्था के तहत सुबह विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। सूर्योदय के साथ बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु, संत और भोज उत्सव समिति के कार्यकर्ता हाथों में मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे और पूरे परिसर में भक्ति एवं उत्साह का माहौल दिखाई दिया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां वाग्देवी की आराधना 

पूजा-अर्चना शुरू होने से पहले भोजशाला परिसर और गर्भगृह को गोमूत्र छिड़ककर शुद्ध और पवित्र किया गया। इसके बाद गर्भगृह को रंगोली, फूलों और पारंपरिक सजावट से आकर्षक रूप दिया गया। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां वाग्देवी की आराधना की और ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया।

बरसों पुरानी परंपरा का पालन करते हुए भोजशाला परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को गर्भगृह में स्थापित किया गया। सूर्य भगवान की पहली किरण के साथ ही पूरा परिसर मंत्रों और जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान कई भक्तों ने नृत्य कर अपनी खुशी व्यक्त की और इसे सांस्कृतिक एवं धार्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

इससे पहले शनिवार शाम केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और मांडू के संत महामंडलेश्वर निसर्ग दास जी महाराज भोजशाला पहुंचे थे। दोनों ने पूजा-अर्चना कर परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनके साथ धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सुरक्षा और नई व्यवस्था को लेकर तैयारियों की समीक्षा की।

सावित्री ठाकुर ने दी शुभकामनाएं

केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने इस अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पहले शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर में हमेशा तनाव और भारी सुरक्षा का माहौल बना रहता था, लेकिन नई गाइडलाइन लागू होने के बाद स्थितियां सामान्य हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अब कोई भी श्रद्धालु किसी भी दिन बिना डर और प्रतिबंध के शांति से दर्शन और पूजा कर सकेगा।

भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने बताया कि रविवार सुबह से ही देवी अनुष्ठान और शुद्धिकरण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि भोजशाला को अब एक भव्य और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। राज्य सरकार भी इस ऐतिहासिक स्थल को उसके प्राचीन गौरव के अनुरूप पुनर्स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोजशाला को भव्य स्वरूप देने की बात कही है। उनका कहना है कि यह स्थल भारतीय संस्कृति, शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इसे उसी ऐतिहासिक पहचान के साथ संवारा जाएगा।

ASI सर्वे के बाद आया कोर्ट का फैसला

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को न्यायालय ने भोजशाला विवाद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना। एएसआई रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद परिसर में संस्कृत, प्राकृत और स्थानीय बोलियों में नागरी लिपि के अभिलेख मिले हैं। इन अभिलेखों को 12वीं से 16वीं शताब्दी ईस्वी के बीच का माना गया है।

रिपोर्ट में पारिजातमंजरी-नाटिका, अवनिकूर्मशतम और नागबंध अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण शिलालेखों का भी उल्लेख किया गया है। इन साक्ष्यों को भोजशाला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रमाण बताया गया है।

भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का केंद्र रही है। ऐसे में अदालत के फैसले और नई गाइडलाइन के बाद अब यहां धार्मिक गतिविधियों की नई शुरुआत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि परिसर में शांति, सुरक्षा और सभी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।

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