वाशिंगटन/नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी युद्ध की आहट के बीच दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के खुलने का रास्ता साफ हुआ है, बल्कि ईरान ने भी पुनर्निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस घटनाक्रम को "विश्व शांति के लिए एक महान दिन" करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अब युद्ध से थक चुका है और शांति की राह देख रहा है। समझौते के तहत, वाशिंगटन और तेहरान एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर काम करने के लिए तैयार हुए हैं। इस युद्धविराम की सबसे बड़ी शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलना है। ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि अमेरिकी सेना वहां ट्रैफिक प्रबंधन में मदद करेगी ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति और जरूरी सामानों की आवाजाही सामान्य हो सके।
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस डील को अंतिम रूप देने से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से गहन बातचीत की। इजरायल ने भी इस 14 दिवसीय युद्धविराम का समर्थन किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इसे "अमेरिका की बड़ी जीत" बताया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले रुकते हैं, तो उनकी सेनाएं भी रक्षात्मक ऑपरेशंस बंद कर देंगी। ईरान ने तकनीकी और समन्वय के साथ जहाजों को रास्ता देने पर सहमति जताई है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आमंत्रित किया है। शरीफ ने उम्मीद जताई कि 'इस्लामाबाद वार्ता' स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने दोनों देशों के नेतृत्व की बुद्धिमत्ता की सराहना करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी बताया।
भले ही व्हाइट हाउस इसे जीत बता रहा हो, लेकिन अमेरिका के भीतर इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
भारत में भी इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने ईरानी नागरिकों के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि नफरत और हिंसा कभी नहीं जीतती, हमेशा साहस की जीत होती है। उन्होंने पश्चिमी देशों की नैतिकता पर भी सवाल उठाए। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पीएम मोदी की कूटनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश का बिचौलिए की भूमिका निभाना मोदी सरकार की रणनीतिक विफलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 'विश्वगुरु' का दावा करने वाली सरकार इस पूरे मामले में मूकदर्शक क्यों बनी रही।
दो सप्ताह का यह समय भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर सहमति बनती है, तो यह मध्य पूर्व के लिए एक "स्वर्ण युग" की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक यह शांति अस्थायी ही रहेगी।
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