श्रीगंगानगर: ‘हरियालो राजस्थान’ को लेकर जिला प्रशासन सख्त, कलक्टर ने दिए 14 लाख पौधों के रोपण और संरक्षण के निर्देश

खबर सार :-
श्रीगंगानगर जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने 'हरियालो राजस्थान' और जिला पर्यावरण समिति की बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए व्यापक पौधारोपण और सिंगल यूज प्लास्टिक उन्मूलन के सख्त निर्देश दिए।

श्रीगंगानगर: ‘हरियालो राजस्थान’ को लेकर जिला प्रशासन सख्त, कलक्टर ने दिए 14 लाख पौधों के रोपण और संरक्षण के निर्देश
खबर विस्तार : -

श्रीगंगानगर: राजस्थान को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ श्रीगंगानगर जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी मुहिम शुरू होने जा रही है। सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने 'मिशन हरियालो राजस्थान' और जिला स्तरीय पर्यावरण समिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी उत्तरजीविता और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।

 वर्ष 2026-27 के लिए बना मेगा प्लान

बैठक को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जिले में चिन्हित किए गए नमूना क्षेत्रों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। मिशन के तहत न केवल सरकारी जमीन, बल्कि शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर भी सघन वन विकसित किए जाएंगे।

 सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगेगा पूर्ण विराम

बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कलक्टर ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जिले में प्रभावी अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए उन्होंने नगर परिषद और संबंधित विभागों को समय-समय पर जब्ती की कार्रवाई और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा।

नर्सरियों में तैयार हो रहे 14 लाख पौधे: तकनीक और प्रबंधन पर जोर

बैठक के दौरान उपवन संरक्षक राकेश दुलार ने विभागीय तैयारियों का ब्यौरा पेश करते हुए बताया कि जिले के हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वन विभाग पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में श्रीगंगानगर की 21 विभिन्न नर्सरियों में कुल 14 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जो आगामी वृक्षारोपण अभियानों के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सभी सरकारी विभाग अपनी आवश्यकता और योजना के अनुसार अपनी नजदीकी नर्सरी में पौधों की मांग (डिमांड) भेज सकते हैं। पौधों के रोपण के साथ-साथ उनकी उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उपवन संरक्षक ने जोर देकर कहा कि मानसून या वर्षा ऋतु के आगमन से पहले ही सभी विभागों को गड्ढे खोदने और पौधों की सुरक्षा के लिए उचित फेंसिंग (बाड़ेबंदी) जैसे आवश्यक कार्य पूर्ण कर लेने चाहिए।

इस बार के अभियान की सबसे बड़ी विशेषता तकनीक का समावेश है। श्री दुलार ने बताया कि पारदर्शिता और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए रोपे जाने वाले प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) अनिवार्य कर दी गई है। इस तकनीक की मदद से हर पौधे की सटीक लोकेशन और उसकी वर्तमान स्थिति को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे वृक्षारोपण की सफलता दर का वास्तविक आकलन संभव होगा।

 विभागों के बीच समन्वय और तकनीक का उपयोग

डॉ. अमित यादव ने आईटी टीम को विशेष निर्देश दिए कि पर्यावरण संबंधी पोर्टल्स और ऑनलाइन रिपोर्टिंग को सरल बनाया जाए। उन्होंने सभी विभागों को पोर्टल के संचालन का प्रशिक्षण देने की बात कही ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान रियल-टाइम में हो सके। कलक्टर ने वन अपराधों, आरा मशीनों के लाइसेंस और पुराने लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर दिया।

 बैठक में उपस्थित अधिकारी

इस उच्च स्तरीय बैठक में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक में अदिति यादव, हरीश मित्तल, ऋषभ जैन, धीरज चावला, डॉ. अजय सिंगला और महावीर प्रसाद सहित वन विभाग व अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।

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