निजी स्कूलों की मनमानी पर उठे सवाल, जिलाधिकारी ने दिए निर्देश

खबर सार :-
रेती रोड पर स्थित डॉ. सुदामा प्रसाद विद्यास्थली में पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। ज़िलाधिकारी से शिकायत करते हुए, स्कूल प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि प्रधानाचार्य ने सरकारी निर्देशों की अनदेखी करते हुए एक नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया है।

निजी स्कूलों की मनमानी पर उठे सवाल, जिलाधिकारी ने दिए निर्देश
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुरः शहर के रेती रोड स्थित डॉ. सुदामा प्रसाद विद्यास्थली में पाठ्यक्रम परिवर्तन को लेकर विवाद गहरा गया है। निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां अभिभावकों और प्रबंधन के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। मामले को लेकर विद्यालय प्रबंधन ने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए प्रधानाचार्या पर शासन के आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग

प्रबंधक संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, विद्यालय में नर्सरी से कक्षा 5 तक का पाठ्यक्रम बिना अनुमति के बदल दिया गया है। आरोप है कि नए कोर्स के तहत एक निर्धारित विक्रेता से किताबें खरीदी जा रही हैं, जिनकी कीमत बाजार दर से लगभग तीन गुना अधिक है। इससे अभिभावकों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

प्रबंधन का कहना है कि इस संबंध में प्रधानाचार्या को कई बार मौखिक और लिखित रूप से निर्देश दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामला गंभीर होता देख जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो बड़ी संख्या में अभिभावक आर्थिक रूप से प्रभावित होंगे।

स्थानीय अभिभावकों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर साल किताबों और कोर्स में बदलाव के नाम पर स्कूलों द्वारा अतिरिक्त पैसा वसूला जाता है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों को कठिनाई होती है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

विभागों के खिलाफ होगी कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें शिकायत प्राप्त होने पर नियमानुसार जांच कराई जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक दबाव का सामना न करना पड़े।

यह मामला एक बार फिर निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में सख्त नियम लागू करने चाहिए। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है, जिससे इस विवाद का समाधान निकल सके।

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