भीलवाड़ाः रामनिवास धाम में सोमवार को भक्ति, सेवा और मानवता का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामस्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज के 228वें निर्वाण महोत्सव के तहत आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला में जहां एक ओर आध्यात्मिक आयोजन हुए, वहीं दूसरी ओर समाज सेवा के कार्यों ने सभी का मन मोह लिया। इस पुण्योत्सव ने यह संदेश दिया कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा में ही उसकी वास्तविक सार्थकता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों के बीच फल वितरण किया गया। कार्यवाहक भंडारी संत नवनिधराम राम की प्रेरणा से किए गए इस सेवा कार्य ने मरीजों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। मरीजों और उनके परिजनों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की सेवा ही सच्चे पुण्य का कार्य है। अस्पताल जैसे वातावरण में इस तरह का स्नेह और सहयोग उन्हें मानसिक रूप से भी राहत देता है।
इसी क्रम में शाहपुरा के समाजसेवी महावीर जागेटिया द्वारा 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री वितरित की गई। इस सेवा कार्य से जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। रामनिवास धाम की ओर से जागेटिया परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया गया। यह पहल समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी।
पुण्योत्सव के चौथे दिन बारादरी में वाणीजी का पाठ आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान संत नवनिधराम राम ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संसार में मनुष्य पहले से ही भ्रमित है, ऐसे में संतों का कर्तव्य उसे और भ्रमित करना नहीं, बल्कि उसके भ्रम को दूर कर सत्य का मार्ग दिखाना है।
उन्होंने जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शरीर एक दिन समाप्त हो जाना है, लेकिन मनुष्य इसे ही अपना सब कुछ मान बैठता है। उन्होंने कहा कि जो शक्ति हमारी श्वासों को संचालित कर रही है, उसी परम तत्व पर विश्वास करना ही सच्चा मार्ग है। इसके विपरीत जो हमें भटकाता है, उस पर विश्वास करना सबसे बड़ा भ्रम है।
संत नवनिधराम राम ने महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज के आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि सत्य और मानवता ही सच्चा धर्म है। जो हर काल में अडिग रहे वही सत्य है और वही परमेश्वर है। उन्होंने श्रद्धालुओं को क्षणभंगुर संसार से ऊपर उठकर शाश्वत सत्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर 7 अप्रैल को विशेष आयोजन होंगे। इस दिन ब्रह्म समाधि पाठ, राम पद्वति का पाठ, विरह भजन, प्रातः 11:15 बजे महाआरती वंदना तथा रात्रि में जागरण का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सूर्यप्रकाश बिड़ला, महावीर जागेटिया, राकेश सोमाणी, रामेश्वर बसेर, कैलाश चंद्र तोषनीवाल, रामसहाय बिड़ला, दीनदयाल मारू सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
यह पूरा आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना, बल्कि समाज सेवा के माध्यम से मानवता का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर गया।
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