पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में रविवार का दिन श्रद्धा और उल्लास के नाम रहा। अवसर था सृष्टि के सृजनकर्ता माने जाने वाले महर्षि कश्यप की जयंती का, जिसे कश्यप समाज द्वारा बेहद भव्य रूप में मनाया गया। शहर के विभिन्न हिस्सों से आए समाज के लोगों ने न केवल महर्षि के चरणों में अपनी आस्था अर्पित की, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प भी लिया।
इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के महिला आयोग की सदस्य कंचन कश्यप और पूर्व मंत्री हीरालाल कश्यप उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन और महर्षि कश्यप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अपने संबोधन में कंचन कश्यप ने कहा कि महर्षि कश्यप के विचार आज के युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की प्रगति और समाज की कुरीतियों को दूर करने पर जोर दिया। वहीं, पूर्व मंत्री हीरालाल कश्यप ने समाज को संबोधित करते हुए कहा "किसी भी समाज की उन्नति का एकमात्र द्वार शिक्षा है। यदि कश्यप समाज संगठित होकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने की दिशा में कार्य करे, तो हमें मुख्यधारा में आने से कोई नहीं रोक सकता।"
कार्यक्रम के दौरान केवल भाषण ही नहीं, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का मन मोह लिया। स्थानीय कलाकारों और बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों और झांकियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महर्षि कश्यप के जीवन वृतांत को गीतों के माध्यम से सुनकर उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर नजर आया।
महर्षि कश्यप जयंती के इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कश्यप समाज के पदाधिकारियों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकजुटता की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जहाँ घनश्याम कश्यप, अनिल कश्यप और यश कंप्यूटर वाले दीपक कश्यप ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए व्यवस्थाओं को संभाला। इनके साथ ही विकास कश्यप, लीलाधर कश्यप, विजय कश्यप और नन्हेलाल कश्यप जैसे वरिष्ठ जनों ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में न केवल बुजुर्गों का मार्गदर्शन मिला, बल्कि भारी संख्या में पहुंचे उत्साहित युवाओं और अन्य वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति ने इस उत्सव को एक बड़े सामाजिक समागम में बदल दिया।
समारोह के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के बीच आपसी भाईचारे को बढ़ाना और नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित कराना था। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में महर्षि कश्यप के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने की शपथ ली।
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