पीलीभीतः जिले में अवैध खनन पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावों के बावजूद खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद नजर आ रहे हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिना नंबर प्लेट और ओवरलोड मिट्टी से भरे वाहन सड़कों पर खुलेआम दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
हाल ही में ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान अधिकारियों को अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने साफ कहा था कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध खनन पाया जाता है तो संबंधित थाना प्रभारी और एसडीएम को जिम्मेदार माना जाएगा। डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके बावजूद जिले में अवैध खनन की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला पीलीभीत की बीसलपुर तहसील क्षेत्र के कोतवाली दियोरिया इलाके के रंभोजा चौराहे का बताया जा रहा है, जहां सुबह से ही मिट्टी खनन का काम चलता रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार खनन माफिया उपजाऊ जमीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालकर विभिन्न स्थानों पर प्लॉटों के पटान में इस्तेमाल कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ लोग निजी परमिशन ऑनलाइन कराकर मिट्टी की खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना किसी रोकटोक के सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आती हैं। इनमें से कई वाहन बिना नंबर प्लेट के ही सड़क पर दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड वाहन हादसों का कारण बन सकते हैं और आम लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल परिवहन विभाग की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। लोगों का आरोप है कि वीरेंद्र सिंह की कार्रवाई ज्यादातर छोटे वाहन चालकों और ई-रिक्शा संचालकों तक ही सीमित दिखाई देती है। यदि किसी टुक-टुक या ई-रिक्शा पर नंबर प्लेट नहीं होती या सवारियां अधिक होती हैं तो तुरंत चालान की कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन खनन में शामिल बड़े वाहनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जिले में कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बिना नंबर प्लेट के चल रही हैं, जिनका इस्तेमाल मिट्टी खनन और परिवहन में किया जा रहा है। इसके बावजूद इन वाहनों पर कार्रवाई नहीं होना सवाल खड़े करता है। लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन केवल छोटे वाहन चालकों पर ही लागू होता दिखाई दे रहा है, जबकि खनन माफिया नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक ओवरलोड मिट्टी से भरे वाहन तेज रफ्तार में गांव और कस्बों से गुजरते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को शिकायतें भी दीं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो बड़े हादसे हो सकते हैं।
ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर बिना नंबर प्लेट के खुलेआम दौड़ रहे वाहनों और अवैध खनन में शामिल लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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