पीलीभीत : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न केवल सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं। एक मकान की दीवार पर लिखे गए विज्ञापन के शब्दों ने विवाद का रूप ले लिया था, जिसे बाद में समझाइश के बाद हटा दिया गया।
पीलीभीत के एक रिहायशी इलाके में उस समय स्थिति तनावपूर्ण होने लगी जब एक मकान की दीवार पर पेंट किया गया विज्ञापन वायरल हुआ। पीले रंग के बैकग्राउंड पर लाल अक्षरों में स्पष्ट रूप से लिखा था— "यह मकान बिकाऊ है, केवल मुस्लिम ए.सी. हेतु संपर्क करें।" जैसे ही इस विज्ञापन की तस्वीर इंटरनेट पर प्रसारित हुई, लोगों ने इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया। स्थानीय निवासियों और सोशल मीडिया यूजर्स का तर्क था कि इस तरह के संदेश समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुँचाते हैं और आपसी भाईचारे में दरार पैदा करते हैं।
मामले के तूल पकड़ते ही राष्ट्रीय हनुमान दल सक्रिय हो गया। संगठन के जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता अपनी टीम के सदस्यों के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने इस विज्ञापन को सामाजिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए मकान मालिक से संवाद स्थापित किया। संगठन के पदाधिकारियों ने मकान मालिक को कानूनी जटिलताओं और सामाजिक संवेदनशीलता के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक रूप से इस तरह का धार्मिक प्रतिबंधात्मक संदेश देना शांति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
अमित गुप्ता ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा "समाज में इस तरह के संदेश आपसी भाईचारे और एकता को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाते हैं। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखना था। हमने मकान मालिक को कानूनी और सामाजिक पहलुओं की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने स्वेच्छा से विवादित स्लोगन बदलने पर सहमति जताई।"
राष्ट्रीय हनुमान दल की पहल और मकान मालिक की समझदारी के चलते इस विवाद का अंत सुखद रहा। विवादित शब्दों को तुरंत दीवार से मिटा दिया गया और पोस्टर को सामान्य शब्दों में बदल दिया गया। अब वहाँ से वह धार्मिक शर्त हटा दी गई है जिसने विवाद को जन्म दिया था। स्थानीय प्रशासन और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान पर संतोष व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित संवाद और समझाइश से बड़े विवादों को टाला जा सकता है।पीलीभीत की यह घटना एक सबक है कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया की निगरानी कितनी तेज है और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी भरा आचरण कितना अनिवार्य है।
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