Mahayuti Government का बड़ा ऐलान: 12.71 लाख किसानों को मिलेगी राहत, 36,585 करोड़ की कर्जमाफी योजना पर जोर

खबर सार :-

महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित कर्जमाफी, राहत पैकेज और कृषि निवेश योजनाएं किसानों को आर्थिक संबल देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं। 12.71 लाख किसानों को राहत देने का फैसला और 36,585 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कर्जमाफी योजना राज्य के कृषि क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान कर सकती है। साथ ही सूखा प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर जोर भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा।
Mahayuti Government का बड़ा ऐलान: 12.71 लाख किसानों को मिलेगी राहत, 36,585 करोड़ की कर्जमाफी योजना पर जोर

खबर विस्तार : -

Mahayuti government farmer relief: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को आर्थिक मजबूती देने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया है। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने बुधवार को विधानसभा में नियम 293 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि महायुति सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कर्जमाफी, सूखा प्रबंधन, कृषि निवेश और महिला किसानों के लिए प्रस्तावित सुधारों को सरकार की प्राथमिकता बताया।

36,585 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी कर्जमाफी योजना

मंत्री भरणे ने बताया कि ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना’ महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी कर्जमाफी योजना है। इस योजना के तहत राज्य के 56.24 लाख किसानों को कुल 36,585 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों पर दो लाख रुपये तक का बकाया कृषि ऋण है, उनका पूरा कर्ज ब्याज सहित माफ किया जाएगा। वहीं, जिन किसानों का बकाया ऋण दो लाख रुपये से अधिक है, उन्हें शेष राशि चुकाने के बाद दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में से किसी भी दो वर्षों में नियमित रूप से फसल ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन बोनस दिया जाएगा।

पुरानी योजनाओं से कहीं बड़ा राहत पैकेज

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान योजना का आकार पूर्व की सभी कर्जमाफी योजनाओं से बड़ा है। वर्ष 2009 की योजना में 4,008 करोड़ रुपये, वर्ष 2017 की छत्रपति शिवाजी महाराज योजना में 24,737 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना में 25,749 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके मुकाबले नई योजना किसानों को कहीं अधिक व्यापक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।

MJPSKY के तहत 12.71 लाख किसानों को राहत

भरणे ने विधानसभा को जानकारी दी कि वर्ष 2019 में लागू महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना (एमजेपीएसकेवाई) के अंतर्गत 12.71 लाख किसानों को राहत देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जल्द ही इस संबंध में औपचारिक घोषणा करेंगे। इस फैसले से लंबे समय से राहत की प्रतीक्षा कर रहे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

खरीफ 2026 के लिए सूखे से निपटने की तैयारी

कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा अल नीनो प्रभाव के चलते सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए विशेष तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 23 जून को राज्य की तैयारियों की समीक्षा भी की। किसानों से अपील की गई है कि पर्याप्त और लगातार बारिश होने तक जल्दबाजी में बुवाई न करें। राज्य सरकार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सीआरआईडीए के सहयोग से ‘ब्रॉड बेड फरो’ (बीबीएफ) तकनीक को बढ़ावा दे रही है तथा इसके लिए उपकरणों पर सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सूखा प्रतिरोधी बीज और सिंचाई पर फोकस

सरकार की ओर से कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहन करने वाली बीज किस्मों का वितरण किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में राज्य में 2,000 से अधिक खेत तालाबों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई, मल्चिंग और जल संरक्षण उपायों को भी प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी फसल उत्पादन प्रभावित न हो।

5,000 करोड़ की कृषि समृद्धि योजना: आधुनिक कृषि को बढ़ावा

कृषि क्षेत्र में पूंजी निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये की ‘कृषि समृद्धि योजना’ शुरू की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि शेष 3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त मांगों के माध्यम से जुटाए जाएंगे। इस योजना के तहत ड्रोन आधारित खाद और कीटनाशक छिड़काव, गांव स्तर पर किसान सेवा केंद्रों की स्थापना तथा ‘आपले शेत, आपले खत’ जैसे जैविक खेती अभियानों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।

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