Jhansi News: जनपद में सट्टेबाजी और जुआ के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस अभियान को लेकर अब राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के निर्देशन में झांसी पुलिस लगातार सट्टेबाजों, जुआरियों और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत पुलिस को लगातार सफलता भी मिल रही है। हालांकि, हाल के दिनों में पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई में कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं जो स्वयं को भाजपा कार्यकर्ता या नेता बताते हैं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई। झांसी सदर क्षेत्र से भाजपा विधायक रवि शर्मा ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस वांछित अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय ऐसे मामलों को अधिक प्रमुखता दे रही है, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है।
विधायक का कहना है कि आए दिन अखबारों और सोशल मीडिया में सट्टेबाजों के साथ भाजपा नेताओं या कार्यकर्ताओं के नाम सुर्खियों में दिखाई देते हैं। इससे आम जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा एक बार फिर सरकार बनाएगी। ऐसे में पार्टी को बदनाम करने वाली किसी भी गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
रवि शर्मा ने यह भी कहा कि जो लोग सट्टेबाजी जैसे अवैध कारोबार में शामिल पाए जा रहे हैं, वे पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि स्वयं को भाजपा नेता बताने वाले छुटभैया कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि पुलिस का ध्यान वांछित और गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों पर भी समान रूप से केंद्रित होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि विधायक रवि शर्मा पहले भी इस मुद्दे को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर झांसी में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो संदेश भी साझा किया था, जिसमें यह कहा गया था कि बड़े अपराधी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
दूसरी ओर, झांसी पुलिस ने सट्टेबाजी और जुआ के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए कई महत्वपूर्ण कार्रवाई की हैं। पुलिस ने दर्जनों संदिग्ध सटोरियों के बैंक खातों को ब्लॉक कराया है, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की है तथा लाखों रुपये की नकदी बरामद कर कई आरोपियों को जेल भेजा है। इसके अलावा फरार आरोपियों पर इनाम भी घोषित किए गए हैं। पुलिस की सख्ती के चलते कई आरोपी न्यायालयों का रुख कर रहे हैं और अग्रिम जमानत के प्रयास कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग मत सामने आने से प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा बनी हुई है। एक पक्ष पुलिस की कार्रवाई को अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठा रहा है।
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