श्रीगंगानगरः नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा महात्मा गांधी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नंबर 5, पुलिस लाइन में अग्नि सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित नागरिक सुरक्षा विभाग के चीफ वार्डन निर्मल जैन ने आग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि रसोई गैस, बिजली, पेट्रोल और डीजल से लगी आग को पानी से बुझाना बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी आग को बुझाने के लिए एबीसी प्रकार के अग्निशमन यंत्र सबसे प्रभावी होते हैं, जो मात्र 14 सेकंड में आग पर नियंत्रण पा सकते हैं। इसलिए हर घर, कार्यालय, दुकान, स्कूल, कॉलेज और वाहनों में आईएसआई मार्क वाले अग्निशमन यंत्र लगाना अत्यंत आवश्यक है।
निर्मल जैन ने आग लगने के मूल कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आग के लिए तीन तत्व आवश्यक होते हैं ऑक्सीजन, ज्वलनशील पदार्थ और उचित तापमान। यदि इनमें से किसी एक तत्व को समाप्त कर दिया जाए, तो आग को बुझाया जा सकता है। उन्होंने इसे मानवजनित आपदा बताते हुए कहा कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर बड़े हादसों को टाला जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाए, तो उसे घबराकर दौड़ना नहीं चाहिए, बल्कि तुरंत जमीन पर लेटकर लुढ़कना चाहिए। इससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है और आग बुझ जाती है। इस सरल उपाय से कई बार जान बचाई जा सकती है।
गैस सिलेंडर में आग लगने की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि लोगों को घबराने के बजाय संयम से काम लेना चाहिए। यदि सिलेंडर में आग लग जाए, तो उसके ऊपर लगातार पानी डालते रहना चाहिए, ताकि उसका तापमान नियंत्रित रहे और वह फटने की स्थिति में न पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर लोग घबराकर घर छोड़कर बाहर भाग जाते हैं और अग्निशमन विभाग को सूचना देते हैं, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले लेती है और भारी नुकसान हो सकता है।
गैस लीकेज के दौरान सावधानियों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार का विद्युत स्विच न ऑन करें और न ही ऑफ करें। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की आग—जैसे माचिस, अगरबत्ती या गैस चूल्हा—जलाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे विस्फोट की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि श्रीगंगानगर में इस प्रकार के कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।
बिजली से लगने वाली आग के संबंध में उन्होंने बताया कि शॉर्ट सर्किट के कारण हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। इससे बचने के लिए समय-समय पर विद्युत तारों और उपकरणों की जांच करना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिजली की आग को पानी से बुझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे करंट लगने का खतरा रहता है। ऐसे मामलों में एबीसी अग्निशमन यंत्र ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।
बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की स्थिति में क्या करें, इस पर भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि सीढ़ियों के माध्यम से नीचे उतरना चाहिए। छत की ओर भागने से बचना चाहिए, क्योंकि आग और धुआं ऊपर की ओर तेजी से फैलता है। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत से बाहर निकलते समय पहले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और भगदड़ से बचना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का डेमो भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें बेहोश व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के सही तरीके बताए गए। यह भी समझाया गया कि बेहोश व्यक्ति को ठोस सतह पर लिटाकर ही सीपीआर देना अधिक प्रभावी होता है।
इस अवसर पर वार्डन मदन लाल ने पेट्रोल और गैस सिलेंडर में लगी आग को बुझाने का लाइव डेमो प्रस्तुत किया, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सही उत्तर देने वालों को सम्मानित किया गया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या रिम्पा तलवार ने नागरिक सुरक्षा विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं, क्योंकि ये उन्हें जीवन की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के प्रति जागरूक बनाते हैं।
इस जागरूकता कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों बल्कि उपस्थित सभी लोगों को आग से बचाव और आपदा प्रबंधन के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। ऐसे आयोजन समाज में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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