Bhilwara: खून से लथपथ बुजुर्ग, खाली पड़ी पुलिस चौकी: ढीकोला में डकैतों का खूनी तांडव, सोती रही शाहपुरा पुलिस!

खबर सार :-

Bhilwara: शाहपुरा के ढीकोला में बदमाशों ने 80 वर्षीय बुजुर्ग रामपाल चेचाणी पर किया जानलेवा हमला। रात भर पीछा करते रहे ग्रामीण, लेकिन सुबह पुलिस चौकी मिली खाली। आक्रोशित जनता ने पुलिस अधीक्षक सागर राणा से शिकायत कर दिया दो दिन का अल्टीमेटम।
Bhilwara: खून से लथपथ बुजुर्ग, खाली पड़ी पुलिस चौकी: ढीकोला में डकैतों का खूनी तांडव, सोती रही शाहपुरा पुलिस!

खबर विस्तार : -

शाहपुरा: शाहपुरा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उपतहसील मुख्यालय ढीकोला (Dhikola) में कानून-व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। बीती रात इस शांत ग्रामीण अंचल में अज्ञात अपराधियों ने जिस दुस्साहस और क्रूरता के साथ एक खूनी वारदात को अंजाम दिया, उसने हर नागरिक को झकझोर कर रख दिया है। रात के घने सन्नाटे में हथियारबंद डकैत गांव के एक संभ्रांत और वयोवृद्ध नागरिक रामपाल चेचाणी के मकान में सेंधमारी के इरादे से दाखिल हुए। अपराधियों का मकसद केवल संपत्ति लूटना था, लेकिन 80 वर्षीय बुजुर्ग की सजगता उन पर भारी पड़ गई। जैसे ही बुजुर्ग की आंखें खुलीं और उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए शोर मचाया, अपराधियों ने अपनी हैवानियत का परिचय देते हुए धारदार हथियारों से उनके सिर पर जानलेवा हमला (deadly assault) कर दिया। सिर से बहती खून की धाराओं के बीच भी उस असहाय बुजुर्ग ने हिम्मत नहीं हारी और उनके चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण लाठियां लेकर घरों से बाहर निकल आए। ग्रामीणों की तत्परता देखकर अपराधी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगलों की तरफ भाग निकले। पूरी रात सैकड़ों ग्रामीण टार्च और लाठियों के सहारे आसपास के बीहड़ों में इन बदमाशों की तलाश (search operations) करते रहे, लेकिन सुरक्षा का दंभ भरने वाली स्थानीय पुलिस का कहीं अता-पता नहीं था।

Bhilwara : रक्षक बने भक्षक: बंद ताले और चौकी से पुलिस नदारद

रात भर खौफ के साए में गुजारने के बाद सुबह होते ही समूचे ढीकोला कस्बे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस खूनी वारदात (violent crime) से आक्रोशित ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाज के प्रबुद्ध लोग सबसे पहले घायल रामपाल चेचाणी के आवास पर पहुंचे, जहां चारों तरफ बिखरा खून पुलिसिया तंत्र की नाकामी की कहानी बयां कर रहा था। इसके बाद जब आक्रोशित जनसैलाब न्याय की मांग को लेकर ढीकोला पुलिस चौकी पहुंचा, तो वहां का नजारा देखकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। चौकी के मुख्य द्वार पर सन्नाटा पसरा हुआ था और वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि रात में वारदात के तुरंत बाद आपातकालीन नंबरों पर कॉल करके घटना की जानकारी दी गई थी, परंतु सुबह के उजाले तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी घटना स्थल (crime scene) पर नहीं पहुंचा। यह स्थिति दर्शाती है कि सुरक्षा व्यवस्था (security system) किस कदर लापरवाह हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि ढीकोला जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्र को पूरी तरह से अपराधियों के रहमों-करम पर छोड़ दिया गया है। यहां तैनात रहने वाले जवानों को अक्सर बड़े पुलिस थानों के वीआईपी वीआईपी ड्यूटी और अन्य कागजी कामों में अटैच कर दिया जाता है, जिससे स्थानीय चौकी महज एक खोखला ढांचा बनकर रह गई है।

Bhilwara अपराधियों की ऐशगाह बना ढीकोला: दो सालों में 50 वारदातें और नतीजा शून्य

ढीकोला में उमड़ा यह जन-आक्रोश केवल एक रात की घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि यह वर्षों से सुलग रहे गुस्से का विस्फोट है। स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि पिछले 24 महीनों के भीतर इस पूरे परिक्षेत्र में चोरी और नकबजनी की लगभग 50 से अधिक घटनाएं घटित हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज तक एक भी मामले का पर्दाफाश नहीं हो सका। पुलिस की यह अकर्मण्यता अपराधियों के लिए एक मूक आमंत्रण साबित हो रही है। तीन दिन पहले ही गांव के एक अन्य नागरिक ओमप्रकाश वैष्णव की मोटरसाइकिल दिनदहाड़े चोरी (motorcycle theft) हो गई थी। इस मामले में ग्रामीणों ने चोर का स्पष्ट चेहरा दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज (CCTV footage) भी पुलिस को सौंपे थे। इसके बावजूद, चौकी प्रशासन ने न तो प्राथमिकी दर्ज करने में मुस्तैदी दिखाई और न ही आरोपी को दबोचने का कोई प्रयास किया। जब पुख्ता सबूत और वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद भी खाकी वर्दी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करती, तो आम जनता का न्याय प्रणाली (judicial system) से भरोसा उठना स्वाभाविक है। पूर्व सरपंच गणपत खटीक ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन की गहरी नींद ने अपराधियों के हौसलों को पंख दे दिए हैं।

Bhilwara नशे का बढ़ता कारोबार और पुलिस प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम

इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी पुलिस तंत्र की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस मंडल अध्यक्ष मनीष नायक ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि ढीकोला चौकी के पूरे पुलिस बल (police force) को जानबूझकर मुख्य थाने में तैनात कर दिया गया है, जिससे यह पूरा इलाका भगवान भरोसे चल रहा है। वहीं, भाजपा के विधानसभा संयोजक सुरेश भाट ने सामाजिक ताने-बाने के टूटने की मुख्य वजह यहां फैल रहे अवैध मादक पदार्थों के जाल को बताया है। गांव के कोने-कोने में बिक रही अवैध शराब, स्मैक और गांजे के कारोबार ने युवाओं की एक ऐसी फौज तैयार कर दी है जो नशे की लत को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ग्रामीणों ने इस बदहाली की सीधी शिकायत फोन के माध्यम से पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) सागर राणा से की है। हालांकि, जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी सागर राणा (Sagar Rana) ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देकर माहौल को शांत करने का प्रयास किया है, लेकिन जनता अब कोरे आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी (strict warning) देते हुए दो दिन का समय दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन डकैतों को गिरफ्तार नहीं किया गया और नियमित रात्रि गश्त (night patrolling) शुरू नहीं हुई, तो पूरा ढीकोला चक्का जाम और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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