राजस्थानः मध्यप्रदेश सीमा पर स्थित भीलवाड़ा जिले का तिलस्वां घाट एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसे का गवाह बन गया। तीन दिन के भीतर दूसरे बड़े हादसे ने क्षेत्र में दहशत और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं। देर रात धौलपुर से बांसवाड़ा जा रही मजदूरों से भरी एक पिकअप अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद कोटा रेफर किया गया है।
यह हादसा सिंगोली थाना क्षेत्र के तिलस्वां घाट पर स्थित खतरनाक मोड़ पर हुआ। जानकारी के अनुसार पिकअप वाहन में पेंट और पुट्टी की भारी बाल्टियां भरी हुई थीं और मजदूर उन्हीं बाल्टियों के ऊपर बैठे हुए थे। देर रात घाट के तीखे मोड़ पर चालक अचानक वाहन से संतुलन खो बैठा, जिसके बाद पिकअप सीधे गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।
दुर्घटना के तुरंत बाद घाट क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। आसपास से गुजर रहे राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। खाई में गिरी पिकअप में फैला पेंट और पुट्टी मजदूरों के शरीर पर पूरी तरह चिपक गया था, जिससे घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह नजर आ रहा था।
सिंगोली थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के बरेली, गाजीपुर और राजस्थान के जयपुर निवासी मजदूरों के रूप में हुई है। सभी मजदूर बांसवाड़ा में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और पुताई कार्य के लिए जा रहे थे। पुलिस मृतकों के परिजनों को सूचना देने के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस से संपर्क कर रही है।
हादसे में घायल मोहम्मद जाकिर, मोहम्मद इदरीस और सोमपाल को पहले सिंगोली अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद कोटा रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार घायलों को कई गंभीर चोटें आई हैं और उनका उपचार जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा, तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घंटों तक चले राहत अभियान के बाद शवों और घायलों को खाई से बाहर निकाला गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि तिलस्वां घाट पर तीन दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले रविवार को इसी घाट पर शिवशक्ति ट्रेवल्स की एक निजी बस खाई में गिर गई थी, जिसमें 32 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सड़क सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तिलस्वां घाट लंबे समय से जर्जर और खतरनाक बना हुआ है, लेकिन प्रशासन ने यहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए हैं। लोगों का कहना है कि घाट पर न तो पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही मजबूत सुरक्षा रेलिंग की व्यवस्था है। लगातार हादसों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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