अयोध्या: धर्म नगरी अयोध्या में भगवान श्री राम के अनन्य मित्र और सामाजिक समरसता के प्रतीक महाराजा निषाद राज की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर शहर में न केवल एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, बल्कि 11 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराकर समाज को सेवा और एकजुटता का संदेश भी दिया गया।
उत्सव का शुभारंभ रेतिया स्थित मुन्ना पहलवान के आवास से हुआ। यहाँ से शुरू हुई शोभायात्रा गुदड़ी बाजार, चौक और रिकाबगंज जैसे शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पोस्ट ऑफिस चौराहे पर जाकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान पूरा मार्ग "जय निषाद राज" के उद्घोष से गुंजायमान रहा। डीजे पर बज रहे भक्तिपूर्ण भजनों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालु भजनों की धुन पर थिरकते नजर आए और पूरे रास्ते निषाद राज के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन किया।
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान राम और निषाद राज की मित्रता को दर्शाती भव्य झांकियां रहीं। इन झांकियों के माध्यम से त्रेतायुग के उस दृश्य को जीवंत करने का प्रयास किया गया, जब निषाद राज ने प्रभु राम को गंगा पार कराया था। मार्ग में जगह-जगह स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया।
इस विशेष आयोजन में राजनीति और समाज सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भदोही सांसद विनोद कुमार विंद रहे। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और जयप्रकाश निषाद शामिल हुए। इसके अलावा, पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी 'खब्बू' और पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय 'पवन' ने भी यात्रा में शामिल होकर निषाद समाज को बधाई दी और सामाजिक एकता पर बल दिया।
इस जयंती समारोह का सबसे भावुक और सराहनीय पक्ष 11 कन्याओं का सामूहिक विवाह रहा, जिसने उपस्थित सभी लोगों का दिल जीत लिया। आयोजन के समापन अवसर पर जब वैदिक मंत्रोच्चार गूंजे, तो पूरा वातावरण पवित्र हो उठा और 11 जोड़े एक-दूसरे के साथ परिणय सूत्र में बंधे। आयोजकों द्वारा नवदंपतियों को गृहस्थी शुरू करने के लिए आवश्यक उपहार और आशीर्वाद भेंट किए गए। समाज के हर वर्ग ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की, क्योंकि यह आयोजन फिजूलखर्च को रोककर जरूरतमंद परिवारों की मदद करने का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करता है।
इसी क्रम में आयोजक श्यामलाल निषाद ने मीडिया और जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि महाराजा निषाद राज की जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और गहरे भाईचारे का संदेश देने का एक पावन अवसर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भगवान राम और निषाद राज की ऐतिहासिक मित्रता हमें आज के दौर में भी समानता, सहयोग और निस्वार्थ समर्पण की प्रेरणा देती है। उनके अनुसार, यह मित्रता सिखाती है कि प्रेम और श्रद्धा के मार्ग पर कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि आपसी विश्वास ही समाज की असली शक्ति है। कार्यक्रम को सफल बनाने में निषाद समाज के संरक्षक डॉ. नानक सरन, अध्यक्ष अरुण कुमार निषाद (एडवोकेट), आशा राम निषाद, मोतीराम, दुर्गेश, गंगाराम, मनीराम, कुश, पतिराम और मुकेश निषाद सहित भारी संख्या में समाज के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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