Makar Sankranti 2026 : हिन्दू धर्म तीज-त्योहारों से भरा हुआ है। साल का पहला पर्व 'मकर संक्रांति' हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सूर्य की उत्तरायण यात्रा का जश्न मनाता है। मकर संक्रांति को खिचड़ी का त्योहार भी कहा जाता है। इस साल मकर संक्रांति को आध्यात्मिक नजरिए से बहुत खास माना जा रहा है। क्योंकि इस साल मकर संक्रांति और माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि भी पड़ रही है, जिसे षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) कहते हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार, संक्रांति और एकादशी का यह संयोग बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है, यानी इस दिन किए गए दान, पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों का फल लंबे समय तक मिलता है। इस बार मकर संक्रांति के दिन न सिर्फ एकादशी है, बल्कि सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बना रहा हैं। इन विशेष योगों में स्नान, दान और पूजा करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना ज़्यादा लाभ मिलता है। यही वजह है कि इस साल मकर संक्रांति को लेकर भक्तों में खास उत्साह है और इस दिन त्योहार मनाना उचित माना जा रहा है।
षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) पर भगवान विष्णु को तिल चढ़ाए जाते हैं, तिल का प्रसाद खाया जाता है और तिल दान किए जाते हैं। इसी तरह, मकर संक्रांति पर भी तिल और गुड़ खाने और दान करने की परंपरा है। इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व होता है। हालांकि साल के पहले त्योहार मकर संक्रांति की तिथि को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी पड़ रही है। ऐसे में एकादशी के कारण खिचड़ी नहीं बनाई जा सकती। इससे त्योहार कैसे मनाया जाए, इस बारे में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
वहीं विद्वानों ने 14 जनवरी के बजाय 15 जनवरी, यानी द्वादशी तिथि को खिचड़ी का त्योहार मनाने की सलाह दी है। दरअसल विष्णु पुराण में एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही है। व्रत रखने वालों के लिए चावल छूना भी वर्जित माना जाता है, जबकि द्वादशी तिथि को चावल दान करना और व्रत खोलना ज़्यादा पुण्यकारी माना जाता है। इसी वजह से 15 जनवरी को खिचड़ी का त्योहार मनाना बेहतर माना जा रहा है।
पंचांग के अनुसार, 13 जनवरी को दोपहर 3:17 बजे से एकादशी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 14 जनवरी को शाम 5:52 बजे तक रहेगी। यानी 14 जनवरी को दोपहर 3:17 बजे सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहा जाता है। इसी समय से संक्रांति का त्योहार शुरू माना जाएगा। इस दिन सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 3:17 बजे से शाम 5:52 बजे तक रहेगा।
हालांकि लोग अगले दिन खिचड़ी बना सकते हैं। ऐसा संयोग 19 साल बाद बन रहा है कि मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी है। इसके अलावा जो लोग एकादशी पर चावल नहीं खाते हैं, उनके लिए एक विकल्प यह है कि वे 14 जनवरी को शाम 5:52 बजे के बाद खिचड़ी दान करें और खाएं। क्योंकि शाम को एकादशी तिथि समाप्त होने के बाद चावल खा सकते हैं।
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