महाशिवरात्रि 2026: बाबा महाकाल के आंगन में 9 दिन का महाउत्सव, 6 फरवरी से विशेष ऋंगार व दर्शन

खबर सार :-
महाशिवरात्रि 2026 पर उज्जैन का बाबा महाकाल मंदिर आस्था, भक्ति और उत्सव का केंद्र बनने जा रहा है। 6 फरवरी से शुरू होने वाला नौ दिवसीय आयोजन भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का विशेष अवसर होगा। 15 फरवरी को दूल्हे के रूप में बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय क्षण बनेंगे।

महाशिवरात्रि 2026: बाबा महाकाल के आंगन में 9 दिन का महाउत्सव, 6 फरवरी से विशेष ऋंगार व दर्शन
खबर विस्तार : -

Mahakal Ujjain Mahashivratri: भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह पर्व महाशिवरात्रि 2026 को लेकर उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां तेज़ हो गई हैं। फाल्गुन मास के इस महापर्व को लेकर मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल दिखने लगा है। महाकाल मंदिर की दीवारों, शिखर और गर्भगृह में रंग-रोगन का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अन्य सभी व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ की जा रही हैं।

15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि

इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इसे लेकर तिथियों में भ्रम की स्थिति को स्पष्ट करते हुए महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि उज्जैन में शिवरात्रि 15 फरवरी को ही परंपरागत रूप से मनाई जाएगी। इसी दिन बाबा महाकाल दूल्हे के रूप में भक्तों को विशेष दर्शन देंगे।

6 फरवरी से शुरू होगा नौ दिवसीय आयोजन

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि केवल एक दिन का पर्व नहीं बल्कि नौ दिनों तक चलने वाला धार्मिक उत्सव है। यह आयोजन 6 फरवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इन नौ दिनों में भगवान भगवान महाकाल अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। आयोजन की रूपरेखा नवरात्रि की तर्ज पर तैयार की गई है, जिसमें प्रतिदिन विशेष पूजा, अभिषेक और शृंगार किया जाएगा।

24 घंटे दर्शन और रुद्राभिषेक

पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि इन नौ दिनों तक बाबा महाकाल का प्रतिदिन रुद्राभिषेक होगा। भक्तों को 24 घंटे निराकार स्वरूप में दर्शन की सुविधा मिलेगी। जलधारी अर्पण, रात्रिकालीन स्नान, वस्त्र धारण और विशेष आरती का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर में नौ अलग-अलग विग्रहों की स्थापना कर विधिवत पूजा संपन्न होगी।

हर दिन अलग रूप में दर्शन

महाशिवरात्रि उत्सव के पहले दिन बाबा महाकाल को दुशाला ओढ़ाकर विशेष शृंगार किया जाएगा। दूसरे दिन शेषनाग धारण कराए जाएंगे। तीसरे दिन घटाघटा की स्थापना होगी, जो शिवलिंग के समान मानी जाती है। चौथे दिन भक्तों को छवि दर्शन होंगे। पांचवें दिन बाबा महाकाल मन-महेश, उमा-महेश, शिव तांडव और होलकर स्वरूप में सजेंगे। आगे के दिनों में भी विविध रूपों में दर्शन का क्रम जारी रहेगा।

महाशिवरात्रि पर चारों पहर की पूजा

15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन विशेष अनुष्ठान होंगे। इस दिन चारों पहर की पूजा, अभिषेक और आरती संपन्न की जाएगी। रात्रि में बाबा महाकाल का स्नान कर दूल्हे के रूप में भव्य शृंगार किया जाएगा। यह विशेष पूजा ‘सेहरा दर्शन’ के नाम से जानी जाती है, जिसे देखने देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

भजन-कीर्तन और व्यवस्थाएं

नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलेगा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। गर्भगृह, मंदिर कुंडों की सफाई और रंग-रोगन का कार्य 6 फरवरी से पहले पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

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