नई दिल्ली : बसंत पंचमी (Basant Panchami) केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा के संगम का उत्सव है। यह दिन विद्या, वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। जैसे ही माघ मास में बसंत पंचमी आती है, चारों ओर पीले रंग की छटा दिखाई देने लगती है, चाहे वह वस्त्र हों, फूल हों या फिर भोजन। इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति और मनोविज्ञान से जुड़ा गहरा अर्थ छिपा है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। यह वह समय होता है जब खेतों में सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, पेड़ों पर नई कोंपलें फूटती हैं और वातावरण में एक नई ताजगी महसूस होती है। पीला रंग इसी नवजीवन, उमंग और नई शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि इस पर्व पर पीले वस्त्र पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। सनातन धर्म में पीले रंग को अत्यंत शुभ माना गया है। यह रंग ज्ञान, विवेक, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग भगवान विष्णु और देवी सरस्वती को प्रिय है। मां सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और पीले फूलों से उनका श्रृंगार किया जाता है। यह रंग बुद्धि की ज्योति, मन की शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नति का संकेत देता है।

ज्योतिष शास्त्र में भी पीले रंग का विशेष महत्व है। यह बृहस्पति ग्रह से जुड़ा माना जाता है, जो गुरु, ज्ञान और नैतिक विवेक का प्रतिनिधि है। बसंत पंचमी (Basant Panchami) पर पीले रंग का प्रयोग विद्या प्राप्ति, मानसिक शांति और सकारात्मक परिवर्तन के लिए शुभ माना जाता है। इसी कारण विद्यार्थी इस दिन विशेष रूप से पीले कपड़े पहनकर सरस्वती पूजन करते हैं। धार्मिक पहलू के साथ-साथ मनोविज्ञान भी पीले रंग को मानव स्वभाव के लिए लाभकारी मानता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीला रंग खुशी, आशावाद और ऊर्जा को बढ़ाता है। यह मस्तिष्क को सक्रिय करता है, रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करता है और नई संभावनाओं के प्रति मन को खुला बनाता है। सूर्य की रोशनी से जुड़ा यह रंग मूड को बेहतर करने और उत्साह जगाने में सहायक माना जाता है।

बसंत पंचमी (Basant Panchami) पर भोजन में भी पीले रंग का विशेष स्थान होता है। घर-घर में केसरिया हलवा, बेसन के लड्डू, मालपुआ और पीले चावल जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं। ये न केवल स्वाद में खास होते हैं, बल्कि पर्व की सकारात्मक ऊर्जा को भी दर्शाते हैं। घरों को पीले फूलों से सजाया जाता है, जिससे वातावरण में उल्लास और पवित्रता का भाव उत्पन्न होता है। कुल मिलाकर, बसंत पंचमी पर पीला रंग केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति, धर्म और विज्ञानतीनों का सुंदर संगम है। यह रंग हमें जीवन में आशा, ज्ञान और नई शुरुआत का संदेश देता है।
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