कन्नूर: केरलम के कन्नूर में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आगामी चुनाव को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और वाम मोर्चा की विचारधाराओं के बीच है, लेकिन इस बार एक नया और “चौंकाने वाला” समीकरण सामने आया है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहली बार देश में वामपंथी दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक तरह की “साझेदारी” देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर किसी वामपंथी दल का किसी अति दक्षिणपंथी दल के साथ जुड़ना असंभव माना जाता रहा है, लेकिन केरलम की राजनीति में अब ऐसा होता दिख रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया।
यूडीएफ के स्टार प्रचारक के तौर पर कन्नूर पहुंचे राहुल गांधी ने दिन की शुरुआत स्थानीय नेताओं के साथ बैठक से की, जिसके बाद उन्होंने जिले भर से आए उम्मीदवारों और समर्थकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वाम दलों में हो रहे बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि अब वे अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुके हैं और कॉरपोरेट हितों के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं।
रैली में सीपीआई (एम) के दो पूर्व वरिष्ठ नेता टी.के. गोविंदन और वी. कुंजिकृष्णन की मौजूदगी का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा कि उनका यूडीएफ के साथ आना इस बदलाव का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पहले वामपंथी दल आम जनता और मजदूर वर्ग के हितों की बात करते थे, लेकिन अब उनका झुकाव बड़े कॉरपोरेट समूहों की ओर हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे देश के अन्य हिस्सों में धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, लेकिन केरलम में आने पर सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसा क्यों है, जबकि भाजपा खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताती है।
गांधी ने केरलम के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और वाम मोर्चा के बीच एक प्रकार की समझ बनी हुई है, जिसके तहत दोनों एक-दूसरे के खिलाफ सख्त कार्रवाई से बचते हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा चाहती है कि केरलम में वाम मोर्चा सत्ता में बना रहे, क्योंकि उसे नियंत्रित करना आसान है। इसके विपरीत, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार को भाजपा नियंत्रित नहीं कर सकती। गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी केवल कांग्रेस ही भाजपा और नरेंद्र मोदी का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने की क्षमता रखती है।
आर्थिक और विदेश नीति के मुद्दों पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हाल के व्यापारिक फैसलों से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से रबर, मक्का, सोया और फलों की खेती करने वाले किसानों की चिंता जताई। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए जा रहे फैसलों में देश के किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
राहुल गांधी ने गौतम अदाणी का नाम लेते हुए भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अदाणी भाजपा की वित्तीय संरचना का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका में अदाणी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला सीधे तौर पर भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से जुड़ा हुआ है।
अपने संबोधन में गांधी ने चुनाव को केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि मूल्यों और विचारधाराओं की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि केरलम की पहचान हमेशा एकता, भाईचारे और अहिंसा के मूल्यों से रही है। यूडीएफ इन मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम करता है, जबकि उनके अनुसार वाम मोर्चा और भाजपा की राजनीति समाज में विभाजन पैदा करती है।
रैली के बाद राहुल गांधी का अगला कार्यक्रम नाडापुरम में निर्धारित है, जहां वे दो और चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। उनके इस दौरे का उद्देश्य यूडीएफ के पक्ष में माहौल बनाना और आगामी चुनावों के लिए जनसमर्थन जुटाना है।
कुल मिलाकर, कन्नूर की इस रैली में राहुल गांधी ने राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों के मुद्दों को उठाते हुए भाजपा और वाम मोर्चा पर तीखा हमला बोला। उनके बयान आने वाले चुनावों में राजनीतिक बहस को और तेज करने वाले माने जा रहे हैं, जहां विचारधारा, विकास और नेतृत्व प्रमुख मुद्दे बनकर उभर रहे हैं।
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