पीएम आवास योजना-ग्रामीण को बड़ी रफ्तार, 12 राज्यों को 10,021 करोड़ रुपए की मिली मंजूरी

खबर सार :-
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले ही 11,121 करोड़ रुपए की मंजूरी जारी की जा चुकी है। अब इसके अतिरिक्त 10,021 करोड़ रुपए से अधिक की नई मंजूरी भी राज्यों को उपलब्ध करा दी गई है।
पीएम आवास योजना-ग्रामीण को बड़ी रफ्तार, 12 राज्यों को 10,021 करोड़ रुपए की मिली मंजूरी
खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत ‘सभी के लिए आवास’ लक्ष्य को तेज गति से पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को 12 राज्यों के लिए 10,021.42 करोड़ रुपए की ‘मूल स्वीकृति’ जारी की। यह राशि मार्च 2029 तक हर गरीब परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

किन राज्यों को होगा लाभ

यह मंजूरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को जारी की गई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों के अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण देश के गरीब परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 4.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 3.91 करोड़ घरों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूरा भी हो चुका है।

सभी को मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि देश का कोई भी गरीब परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर न रहे। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत की गई थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “जब किसी परिवार को अच्छा घर मिलता है तो उसका जीवन आसान हो जाता है। हम केवल मकान नहीं बना रहे, बल्कि ऐसे घर तैयार कर रहे हैं जिनमें सड़क, बिजली, शौचालय, पीने का पानी और एलपीजी कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों।” उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आवास लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है, लेकिन केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से इसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों द्वारा योजना को सफल बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने मानसून को ध्यान में रखते हुए विशेष पहल शुरू की हैं। इनमें हेल्पलाइन सेवा, शिकायत निवारण प्रणाली, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन और राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी पहलें शामिल हैं। इन प्रयासों से योजना की प्रगति में तेजी आई है और लाभार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

कई अन्य मुद्दों का किया उल्लेख

महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी शिवराज सिंह चौहान ने योजना की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पीएमएवाई-जी के तहत स्वीकृत लगभग 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में दिए गए हैं। इससे महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई गरीब परिवारों के पास जमीन नहीं होने के कारण आवास निर्माण प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में राज्यों को विशेष पहल करते हुए पात्र परिवारों को जमीन उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि कोई भी जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित न रहे। मंत्री ने राज्यों से आवंटन से संबंधित प्रतिबंधों और प्रक्रियाओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कुछ राज्य अभी भी वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्यों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर पाए हैं। उन्होंने संबंधित राज्यों से 30 जून 2026 तक लंबित प्रक्रियाएं पूरी करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने की अपील की।

पेड़ लगाने की अपील

इसके साथ ही मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सभी लाभार्थियों से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण केवल मकान निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन चुकी है। इससे लाखों गरीब परिवारों को बेहतर जीवन, सुरक्षा और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो रहा है।
 

अन्य प्रमुख खबरें