नई दिल्ली : भारत के पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक राष्ट्र की नींव रखने वाले पंडित जवाहरलाल नेहरू की आज पुण्यतिथि है। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के राजनीतिक फलक पर वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर नेताओं ने उन्हें शिद्दत से याद किया। राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों की राजधानियों तक, सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम शीर्ष दिग्गजों ने नेहरू के ऐतिहासिक योगदान, उनकी दूरगामी सोच और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को रेखांकित करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री को याद करते हुए आज पूरा देश उनके द्वारा स्थापित वैज्ञानिक और संस्थागत ऊंचाइयों का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।
आज सुबह से ही सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न राजकीय मंचों पर नेताओं के संदेशों की बाढ़ आ गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समकालीन राजनीति में चाहे कितनी भी कड़वाहट क्यों न हो, लेकिन जब बात राष्ट्र निर्माण के शुरुआती दौर की आती है, तो नेहरू की विराट छवि को कोई भी दल नजरअंदाज नहीं कर पाता। पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के इस गंभीर क्षण में कांग्रेस पार्टी सहित कई गैर-कांग्रेसी सरकारों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश नेतृत्व ने भी उनके जनहितैषी कार्यों को खुले मन से स्वीकार किया है।
यह बेहद दिलचस्प और भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाने वाला दृश्य था जब पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश से सत्ताधारी दल की तरफ से एक बड़ा बयान आया। अरुणाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर भारत के इस महान सपूत को नमन किया। भाजपा राज्य इकाई ने लिखा कि भारत रत्न जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्ण नमन। इसके साथ ही उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि राष्ट्र के प्रति पंडित नेहरू की निस्वार्थ सेवा और उनके बेजोड़ योगदान को यह देश हमेशा अपनी स्मृतियों में सहेजकर रखेगा। यह संदेश इस बात का गवाह है कि राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में नेहरू की प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।
वहीं दूसरी तरफ, बिहार के मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता नीतीश कुमार ने भी बेहद नपे-तुले और सम्मानजनक शब्दों में देश के प्रथम प्रधानमंत्री को याद किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. पं. जवाहर लाल नेहरु की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि। बिहार की राजनीति में नेहरू के समाजवाद की एक अमिट छाप रही है, और नीतीश कुमार का यह बयान उसी ऐतिहासिक सम्मान की निरंतरता को प्रकट करता है।
कांग्रेस पार्टी के भीतर अपने इस वैचारिक स्तंभ को लेकर गहरा भावनात्मक माहौल देखा गया। देश के मध्य भाग से लेकर संसद के गलियारों तक, कांग्रेस नेताओं ने नेहरू के उस विजन को याद किया जिसने भारत को एक आत्मनिर्भर देश बनाया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने एक बेहद भावुक और विस्तृत पोस्ट साझा की। कमलनाथ ने लिखा कि महान स्वतंत्रता सेनानी, देश के प्रथम प्रधानमंत्री, आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कमलनाथ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नेहरू ने भारत के चहुंमुखी विकास की जो मजबूत आधारशिला रखी थी, वह आज भी पूरी दुनिया के सामने अद्वितीय है। भारत में लोकतंत्र की स्थापना करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं का जमीनी स्तर पर प्रसार करना उनका सबसे बड़ा ऐतिहासिक योगदान था। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत के समाज में व्याप्त गैर-बराबरी को दूर करने और देश को आर्थिक व तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया। कमलनाथ के शब्दों में कहें तो युगों-युगों तक उनकी यह कीर्ति भारतीय इतिहास के पन्नों पर अमर रहेगी।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी पंडित नेहरू के वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जमकर तारीफ की। सिंघार ने अपने संदेश में राष्ट्र निर्माण, प्रगति और एकता के प्रतीकात्मक पहलुओं को छुआ। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में नेहरू का योगदान, विशेष रूप से उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण (साइंटिफिक टेम्परामेंट), लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट आस्था और देश की शिक्षा व विभिन्न तकनीकी संस्थाओं को सशक्त बनाने की उनकी दूरदर्शी सोच हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। सिंघार ने इस बात की शपथ भी ली कि इस विशेष दिन पर हम सभी उनके दिखाए गए महान आदर्शों पर चलने का दृढ़ संकल्प लेते हैं।
इसी ऐतिहासिक संदर्भ को उठाते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने नेहरू के एक बेहद मशहूर और प्रासंगिक कथन को उद्धृत किया। सुरजेवाला ने लिखा कि 'आप दीवार के चित्रों को बदल कर इतिहास के तथ्यों को नहीं बदल सकते हैं।' इस कड़े और गंभीर कथन को कोट करते हुए सुरजेवाला ने आधुनिक भारत के असली निर्माता को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन किया। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जहाँ इतिहास के पुनर्लेखन को लेकर बहस छिड़ी रहती है।
पंडित नेहरू केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक उच्च कोटि के लेखक और विचारक भी थे। इसी पहलू को उजागर करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री और उभरती हुई नेता रोहिणी आचार्य ने नेहरू की साहित्यिक और वैचारिक क्षमता को सलाम किया। रोहिणी आचार्य ने अत्यंत आदरपूर्वक लिखा कि स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों में से एक, उत्कृष्ट विचारक, विलक्षण लेखक, आधुनिक भारत के नवनिर्माण की मजबूत नींव रखने वाले युग-द्रष्टा, देश के प्रथम प्रधानमंत्री, भारत-रत्न जवाहरलाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि। रोहिणी के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवा पीढ़ी भी नेहरू की किताबों जैसे 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और उनकी वैश्विक दृष्टि से कितनी गहराई से प्रभावित है।
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने भी नेहरू के स्वतंत्रता आंदोलन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले हमारे प्रथम प्रधानमंत्री को यह देश कभी भूल नहीं सकता। पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि हमें उस कठिन दौर की याद दिलाती है जब देश के पास सुई तक नहीं बनती थी, और वहाँ से लेकर आज के सशक्त और परमाणु ऊर्जा संपन्न भारत के नवनिर्माण में उनका प्रारंभिक रोडमैप ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक रहा है। उनका यह अतुलनीय योगदान देश के इतिहास में हमेशा स्मरणीय रहेगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो, पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर देश के विभिन्न कोनों से आए ये राजनीतिक संदेश इस बात की तस्दीक करते हैं कि नेहरू का व्यक्तित्व किसी एक पार्टी या विचारधारा की सीमाओं में बंधा हुआ नहीं है। वे भारत की उस साझा विरासत का हिस्सा हैं जिसने आधुनिकता, विज्ञान, उद्योग और लोकतंत्र के चार स्तंभों पर आज के भारत की भव्य इमारत खड़ी की है। इतिहास गवाह है कि नीतियां बदल सकती हैं, सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन भारत की बुनियाद में जो नेहरूवादी संस्थागत ढांचे और मूल्य मौजूद हैं, वह हमेशा इस देश को आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देते रहेंगे।
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