लोकसभा में ‘जी राम जी बिल’ पर सियासी घमासान, विपक्ष ने फाड़ी कॉपी

खबर सार :-
लोकसभा में ‘जी राम जी बिल’ पर हुई बहस ने साफ कर दिया कि मनरेगा के नाम और स्वरूप को लेकर राजनीति तेज है। सरकार इसे गांधी जी के आदर्शों से प्रेरित ग्रामीण विकास का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे बापू के नाम से छेड़छाड़ मान रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और राजनीतिक गर्मी बढ़ा सकता है।

लोकसभा में ‘जी राम जी बिल’ पर सियासी घमासान, विपक्ष ने फाड़ी कॉपी
खबर विस्तार : -

Loksabha Ji Ram Ji Bill: लोकसभा में गुरुवार को उस समय तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली, जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत: जी राम जी’ किए जाने से संबंधित बिल पर चर्चा शुरू हुई। विपक्षी दलों ने इसे महात्मा गांधी के अपमान से जोड़ते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बहस के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी फाड़ दी और उसे सदन में उछाल दिया।

शिवराज सिंह चौहान का तीखा जवाब

कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि महात्मा गांधी उनके लिए केवल एक नाम नहीं, बल्कि आस्था, प्रेरणा और विश्वास हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार बापू का अपमान नहीं कर रही, बल्कि उनके आदर्शों और विचारों को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। शिवराज ने कहा कि उन्होंने रात डेढ़ बजे तक सदस्यों की बातें सुनीं और अब जवाब देना उनका अधिकार है।

हंगामे पर जताई नाराजगी

शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सांसदों के हंगामे पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अपनी बात कहकर दूसरे की बात न सुनना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है। बापू के सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह भी एक प्रकार की हिंसा है, जो गांधी जी के अहिंसा के विचार से मेल नहीं खाती।

गांवों के विकास से जुड़ा बिल

मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष गांवों के विकास से जुड़े बिल का विरोध कर रहा है, जो समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यह बिल देश के गांवों के उत्थान के लिए लाया गया है और सरकार किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करती। चाहे चेन्नई हो या गुवाहाटी, कश्मीर हो या कन्याकुमारी-पूरा देश सरकार के लिए एक समान है। हमारे विचार संकीर्ण नहीं, बल्कि समावेशी हैं।

गांधी जी और भाजपा की विचारधारा

महात्मा गांधी को याद करते हुए शिवराज ने कहा कि बापू भाजपा के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी ने गांधी जी के सिद्धांतों को अपनी पंच निष्ठाओं में शामिल किया है। गांधी जी का मानना था कि गांव भारत की आत्मा हैं और अगर गांव कमजोर होंगे तो देश भी कमजोर होगा। नया बिल इसी सोच से प्रेरित है और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।

‘एक भारत’ की अवधारणा

लोकसभा में विपक्ष के भेदभाव के आरोपों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अलग भाषा, अलग वेश-भूषा और अलग परंपराओं के बावजूद भारत एक है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है और कश्मीर इसका मस्तक है।

भारत माता और राष्ट्र निर्माण

शिवराज ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि भारत माता हमारे बचपन का झूला, जवानी की फुलवारी और बुढ़ापे की काशी हैं। पूरे देश का संतुलित और समग्र विकास मोदी सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने समाज के लिए जीने वाले लाखों कार्यकर्ता तैयार किए हैं, जो राष्ट्र निर्माण में लगे हैं।

मनरेगा के नाम और आंकड़ों पर बहस

मनरेगा के नाम को लेकर शिवराज ने कहा कि शुरुआत में इस योजना का नाम महात्मा गांधी पर नहीं था। वर्ष 2009 के चुनाव के समय कांग्रेस को गांधी जी याद आए और तब उनके नाम को जोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि योजना को पूरी ताकत से लागू करने का काम मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने यूपीए और मोदी सरकार के दौरान सृजित मानव श्रम दिवस और बजटीय खर्च के आंकड़े भी सदन में रखे।

कांग्रेस पर सीधा हमला

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शिवराज ने कहा कि प्रियंका गांधी वाड्रा सरकार पर नाम बदलने की सनक का आरोप लगा रही हैं, जबकि नाम रखने की सनक कांग्रेस में रही है। उन्होंने गिनाया कि नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर योजनाएं, सड़कें, संस्थान, उत्सव और यहां तक कि 15 राष्ट्रीय उद्यान तक रखे गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि गांधी जी के नाम पर वास्तव में कितनी योजनाएं चलाई गईं?

मनरेगा की कमियां और नया बिल

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा के बेहतर क्रियान्वयन का काम मौजूदा सरकार ने किया है। उन्होंने गांधी जी के 1948 के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस का काम पूरा हो गया है और उसे भंग कर देना चाहिए। शिवराज ने आरोप लगाया कि सत्ता से चिपके रहने की चाह में कांग्रेस ने गांधी जी के इस विचार को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि सरकार ढोंग में नहीं, बल्कि काम में विश्वास रखती है और गांवों के सशक्तीकरण के लिए नया बिल लाई है।

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