International Everest Day : 29 मई... कैलेंडर में दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह दिन उन दो महान पर्वतारोहियों, सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे, को समर्पित है, जिन्होंने 1953 में पहली बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक कदम रखा था। यह सिर्फ एक पर्वत पर चढ़ाई की कहानी नहीं है, बल्कि हिम्मत, धैर्य और जुनून की ऐसी मिसाल है, जो आज भी पर्वतारोहियों को प्रेरित करती है।
माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई करीब 8,848 मीटर है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचना आज भी आसान नहीं माना जाता, जबकि 1953 में तो तकनीक और सुविधाएं भी बहुत सीमित थीं। उस दौर में एवरेस्ट पर चढ़ना लगभग असंभव माना जाता था। कई लोगों ने कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे समय में न्यूजीलैंड के एडमंड हिलेरी और नेपाल के शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने दक्षिणी नेपाल के रास्ते से एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया।
29 मई 1953 का वह दिन आज भी दुनिया के पर्वतारोहण इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में नेपाल सरकार ने 2008 में, एडमंड हिलेरी के निधन के बाद, 29 मई को अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस घोषित किया। हिलेरी उस समय 88 वर्ष के थे। वहीं तेनजिंग नोर्गे का निधन 1986 में हुआ था, लेकिन उनकी विरासत आज भी लोगों को प्रेरित करती है।
यह दिन केवल एवरेस्ट विजय का जश्न नहीं है, बल्कि उन शेरपाओं और पर्वतीय गाइडों को सम्मान देने का अवसर भी है, जो हर अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तेनजिंग नोर्गे खुद एक शेरपा थे और उन्होंने दुनिया को दिखाया कि ऊंचे पहाड़ों में शेरपा समुदाय की भूमिका कितनी अहम होती है।
एडमंड हिलेरी सिर्फ एक सफल पर्वतारोही ही नहीं थे, बल्कि नेपाल और वहां के लोगों के लिए उन्होंने बहुत काम किया। उन्होंने 1960 में हिमालयन ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके जरिए नेपाल के सुदूर इलाकों में स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनवाई गईं। उनके प्रयासों से हजारों शेरपा परिवारों की जिंदगी बेहतर हुई। यही वजह है कि नेपाल में उन्हें बहुत सम्मान से याद किया जाता है।
तेनजिंग नोर्गे ने भी पर्वतारोहण को नई पहचान दी। उन्होंने दार्जिलिंग में हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संस्थान आज भी पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रसिद्ध है। बाद में उन्होंने एक ट्रेकिंग कंपनी भी शुरू की, ताकि साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
माउंट एवरेस्ट सिर्फ एक पर्वत नहीं, बल्कि लोगों के सपनों और चुनौतियों का प्रतीक है। हर साल दुनिया भर से हजारों पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करते हैं। हालांकि यह सफर बेहद कठिन होता है। यहां बर्फीले तूफान, ऑक्सीजन की कमी और खतरनाक रास्तों जैसी कई चुनौतियां होती हैं। इस वजह से हर कोई यहां तक नहीं पहुंच पाता है।
अन्य प्रमुख खबरें
2026-06-06
2026-06-06
आय से अधिक संपत्ति मामले में ITDA अभियंता के ठिकानों पर छापा, कई शहरों में एक साथ कार्रवाई
2026-06-06
Malviya Nagar Fire: पुलिस ने कुक को किया गिरफ्तार, सुरक्षा नियमों में मिलीं गंभीर खामियां
2026-06-06
2026-06-06
2026-06-06
2026-06-06
Professor Murder Case:देबस्मिता पॉल हत्याकांड में नया खुलासा, CCTV में कैद हुआ वीडियो
2026-06-05
2026-06-05
देश की सुरक्षा से समझौता नहीं...सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका
2026-06-05
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर रोक से हाईकोर्ट का इनकार, याचिका खारिज
2026-06-05
2026-06-05
Generic Drugs असर में ब्रांडेड से ज़रा भी कम नहीं, केरल की स्टडी ने तोड़ा महंगी दवाओं का भ्रम
2026-06-05
2026-06-05
2026-06-05