India-UK CETA implementation : जल्द जुड़ेगा भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय पीयूष गोयल के ब्रिटेन दौरे से काउन्टडाउन शुरू!
खबर सार :-
India-UK CETA implementation : केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का तीन दिवसीय ब्रिटेन दौरा शुरू! हर पैराग्राफ के विस्तृत विश्लेषण और उपशीर्षक के साथ जानें 15 जुलाई से लागू हो रहे ऐतिहासिक CETA और DCC समझौते के मायने।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 जून 2026 तक तीन दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण और आधिकारिक ब्रिटेन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल यात्रा को लेकर वैश्विक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सबसे खास बात यह है कि आगामी 15 जुलाई 2026 से दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) पूरी तरह से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक व्यापार संधि के क्रियान्वयन से ठीक पहले हो रहे इस दौरे को गेम-चेंजर माना जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे का मुख्य केंद्र बिंदु India-UK CETA implementation की जमीनी रूपरेखा तैयार करना है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक अभूतपूर्व और नई ऊंचाई मिलने वाली है।
पीटर काइल के साथ सीमा शुल्क और टैरिफ नियमों को अंतिम रूप देने की रणनीति
सरकारी सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस तीन दिवसीय सघन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ब्रिटेन के बिजनेस एंड ट्रेड सचिव पीटर काइल के साथ आमने-सामने एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस महाबैठक का मुख्य एजेंडा India-UK CETA implementation से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं को सुलझाना और डीसीसी के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। इस वार्ता में दोनों देशों की नियामक प्रक्रियाओं के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाने, सीमा शुल्क व्यवस्था (customs clearance) को बेहद सरल और पारदर्शी बनाने तथा प्रशासनिक बाधाओं को जड़ से खत्म करने के अंतिम तंत्र पर मुहर लगेगी। सीईटीए के तहत जो टैरिफ उदारीकरण (tariff liberalization) होने वाला है, उसकी अंतिम तैयारियों को परखना इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य है। इससे भारतीय निर्यातकों (Indian exporters) के लिए ब्रिटेन के बाजारों के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे और देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह तेजी से बढ़ेगा।
भारतीय पेशेवरों को दोहरे टैक्स और सामाजिक सुरक्षा अंशदान की मार से बड़ी मुक्ति
इस ऐतिहासिक समझौते में एक और बड़ा पहलू डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन यानी डीसीसी का लागू होना है। इसके रोडमैप पर इस बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह व्यवस्था उन भारतीय पेशेवरों और कर्मचारियों (working professionals) के लिए वरदान साबित होगी जो अस्थायी रूप से काम के सिलसिले में ब्रिटेन जाते हैं। अब तक उन्हें दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (double social security contribution) की मार झेलनी पड़ती थी, जिससे उनकी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स और कंट्रीब्यूशन में चला जाता था। इस नई व्यवस्था के बाद पेशेवरों की वैश्विक आवाजाही को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी और भारतीय प्रतिभाओं का डंका पूरी दुनिया में बजेगा। वाणिज्य मंत्रालय का मानना है कि India-UK CETA implementation के बाद दोनों देशों के सेवा क्षेत्रों (service sectors) में बाजार पहुंच के विवाद पूरी तरह सुलझ जाएंगे और एक खुली, पारदर्शी व नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था स्थापित होगी, जो प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' (Developed India) के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
इंडिया ग्लोबल फोरम के वैश्विक मंच से अंतरराष्ट्रीय पूंजीपतियों को खुली चुनौती
अपने इस व्यस्त और रणनीतिक दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल केवल सरकारी बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे कई बड़े गवर्नमेंट-टू-बिजनेस यानी जीटूबी (G2B) कार्यक्रमों में भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएंगे। वे मशहूर 'इंडिया ग्लोबल फोरम' (India Global Forum) के भव्य उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। इस वर्ष इस वैश्विक मंच का मुख्य विषय "कैपिटल, इनोवेशन एंड द यूके-इंडिया मोमेंट" (Capital, Innovation and the UK-India Moment) रखा गया है। इस मंच से पीयूष गोयल दुनिया भर के निवेशकों को यह बताएंगे कि कैसे India-UK CETA implementation के बाद वैश्विक कारोबार और निवेश के लिए भारत में संभावनाओं का एक असीम समंदर हिलोरें मार रहा है।
रोल्स-रॉयस और एचएसबीसी जैसी वैश्विक महाशक्तियों के साथ विनिर्माण पर महामंथन
इसके साथ ही, भारत में रणनीतिक निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्री दुनिया की कुछ सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। इनमें बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एचएसबीसी (HSBC Global Trade Solutions) और विमानन व रक्षा क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce) शामिल हैं। इन बैठकों का सीधा मकसद भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (global manufacturing hub) बनाना और देश में अत्याधुनिक तकनीकों को लेकर आना है। इसके अलावा, वह यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UK India Business Council) द्वारा आयोजित एक विशेष बिजनेस प्लेनरी और वीआईपी लंच कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस हाई-प्रोफाइल लंच में टाटा समूह (Tata Group), टीसीएस (TCS), प्रूडेंशियल (Prudential), डी बीयर्स (De Beers) और बेकर मैकेंजी (Baker McKenzie) जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों के सीईओ और एमडी मौजूद रहेंगे, जहां भारत-यूके आर्थिक साझेदारी के नए आयामों पर मंथन होगा।
एशिया हाउस राउंडटेबल में दुनिया की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं के सामने भारत की हुंकार
वैश्विक वित्तीय शक्तियों को भारत की तरफ आकर्षित करने के लिए पीयूष गोयल लंदन के प्रतिष्ठित 'एशिया हाउस' (Asia House) में एक विशेष राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। इस बैठक में जेपी मॉर्गन (JP Morgan), स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered), लॉयड्स (Lloyds), मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) और अरुप (Arup) जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय महाशक्तियों के कर्ता-धर्ता शामिल होंगे। यहां चर्चा का मुख्य फोकस भारत की बढ़ती औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक सप्लाई चैन (global supply chain) में भारत की मजबूत स्थिति होगी। इस दौरान वे निवेशकों को आश्वस्त करेंगे कि India-UK CETA implementation से उनके निवेश को न केवल सुरक्षा मिलेगी बल्कि बेहतरीन रिटर्न भी मिलेगा। दौरे के आखिरी पड़ाव में वे भारतीय उद्योग प्रतिनिधिमंडल और ब्रिटिश-भारतीय कारोबारी समुदाय से मिलकर वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच 120 अरब डॉलर (120 billion dollars) के द्विपक्षीय व्यापार के महा-लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति साझा करेंगे। निश्चित रूप से पीयूष गोयल का यह दौरा भारत की आर्थिक संप्रभुता और वैश्विक व्यापार में एक नया इतिहास रचने जा रहा है।
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