AMCA प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार: चीन-अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी, इन कंपनियों मिली जिम्मेदारी

खबर सार :-
एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट  भारतीय रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। भारत सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर नजर आ रही है बता दें कि यह परियोजना की गति को तेज़ करेगी और अत्याधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ बनाएगी। सरकार इसे जल्द पूरा करने के समय सीमा भी तय कर दी है।
AMCA प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार: चीन-अमेरिका को टक्कर देने की तैयारी, इन कंपनियों मिली जिम्मेदारी
खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः भारत ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं में शामिल एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने पहली बार इस स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट के निर्माण के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और आधुनिक सैन्य क्षमता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

HAL नहीं निजी कंपनी पर जताया भरोसा

अब तक भारत में लड़ाकू विमानों के निर्माण में मुख्य भूमिका सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड निभाती रही है, लेकिन इस बार सरकार ने पारंपरिक मॉडल से अलग रास्ता अपनाया है। रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैमानिकी विकास अभिकरण (ADA) ने निजी कंपनियों के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। चुनी गई कंपनी को पूरे विमान के निर्माण और सिस्टम इंटीग्रेशन की जिम्मेदारी दी जाएगी।

AMCA भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट होगा। इसे अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक के साथ डिजाइन किया जा रहा है ताकि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान बेहद मुश्किल हो। इसकी तुलना अमेरिका के Lockheed Martin F-35 Lightning II, चीन के J-35 और रूस के Sukhoi Su-57 जैसे आधुनिक फाइटर विमानों से की जा रही है।

प्रोजेक्ट के लिए तय की समय सीमा

विशेषज्ञों के अनुसार AMCA की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी होगी। विमान में ऐसे विशेष मैटेरियल और एयरोडायनामिक डिजाइन का इस्तेमाल किया जाएगा जो रडार सिग्नेचर को कम करेगा। इसके अलावा इसमें हथियार भीतर रखे जाएंगे। इससे रडार पर इसकी पहचान और भी कठिन हो जाएगी। यही वजह है कि इसे भविष्य का “घोस्ट फाइटर” कहा जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए सख्त टाइमलाइन तय की है। परियोजना के तहत पांच उड़ान योग्य प्रोटोटाइप और एक ग्राउंड टेस्ट मॉडल तैयार किया जाएगा। योजना के अनुसार पहला प्रोटोटाइप 30 महीनों के भीतर उड़ान भर सकता है। अगले 64 महीनों में सभी पांच प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जबकि 84 महीनों के भीतर लगभग 1800 टेस्ट उड़ानें पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस परियोजना की खास बात यह है कि चुनी गई निजी कंपनी को केवल विमान का ढांचा ही नहीं बल्कि इंजन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्यूल सिस्टम, एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम जैसे सभी महत्वपूर्ण हिस्सों को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर विकसित करना होगा। यानी पूरी प्रणाली का समन्वित विकास एक ही छत के नीचे किया जाएगा।

तीन बड़े समूहों ने मिलाया हाथ

करीब 15 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए तीन बड़े निजी कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टूब्रो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का कंसोर्टियम तथा भारत फोर्ज और BEML से जुड़े समूह शामिल हैं। इन कंपनियों को प्रस्ताव जमा करने के लिए कुछ महीनों का समय दिया गया है।

सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट को वित्तीय सहायता दे रही है। चुनी गई कंपनी को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ADA के साथ मिलकर काम करना होगा। परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में लगभग 650 एकड़ भूमि पर नई ग्रीनफील्ड सुविधा विकसित की जा रही है। यहीं पर AMCA के प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे।

कई बड़ी कंपनियों ने किया था आवेदन

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए AMCA बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। जहां आवश्यकता लगभग 42 स्क्वाड्रन की मानी जाती है, वहीं मौजूदा संख्या करीब 30 के आसपास है। ऐसे में भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत महसूस की जा रही है।

ADA और DRDO ने 2025 के मध्य में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया था, जिसके बाद सात कंपनियों ने आवेदन किया। तकनीकी मूल्यांकन के बाद तीन कंसोर्टियम को अंतिम चरण के लिए चुना गया। उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी से मार्च 2027 के बीच अंतिम अनुबंध प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

गेम चेंजर साबित होगा ये प्रोजेक्ट

यदि परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो पहला प्रोटोटाइप 2028 से 2032 के बीच उड़ान भर सकता है। इसके बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने पर यह विमान 2035 के बाद भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है।

AMCA परियोजना को भारत के रक्षा क्षेत्र में गेम चेंजर माना जा रहा है। इसके सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो स्वयं पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट डिजाइन और विकसित करने की क्षमता रखते हैं। यह केवल एक लड़ाकू विमान परियोजना नहीं बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक सामरिक शक्ति का प्रतीक भी माना जा रहा है।

यह भी पढ़ेंः-कोल इंडिया में हिस्सेदारी बेचकर सरकार जुटाएगी 5,000 करोड़ रुपये, OFS को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स
 

अन्य प्रमुख खबरें