BRICS 2026: PM मोदी ने की विदेश मंत्रियों से मुलाकात, जयशंकर ने वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा

खबर सार :-
BRICS 2026: दो-दिवसीय BRICS सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई देशों के विदेश मंत्री भारत मंडपम पहुंच चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक बैठक की। इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

BRICS 2026: PM मोदी ने की विदेश मंत्रियों से मुलाकात, जयशंकर ने वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो-दिवसीय BRICS सम्मेलन में शामिल होने आए विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। यह बैठक पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा थी। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में पहले ही एक आधिकारिक घोषणा कर दी थी।

प्रधानमंत्री ने सभी आगंतुक गणमान्य व्यक्तियों के साथ एक संयुक्त बैठक की। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा आयोजित रात्रिभोज शाम 7 बजे भारत मंडपम में होगा। गुरुवार सुबह ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे।

वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष

भारत मंडपम में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनियाभर से आए विदेश मंत्रियों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए, एस. जयशंकर ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत का स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा, "शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के मूल में हैं। हाल के संघर्षों ने संवाद और कूटनीति के अत्यंत महत्व को और अधिक रेखांकित किया है। इस जटिल और अनिश्चित दुनिया में चर्चाओं को सतत विकास की दिशा में निर्देशित किया जाना चाहिए, साथ ही समानता और साझी लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांतों को भी बनाए रखना चाहिए।"

समुद्री आवागमन का अबाधित होना अनिवार्य

डॉ. जयशंकर ने उल्लेख किया कि तकनीकी प्रगति वैश्विक परिदृश्य को नया आकार दे रही है और इसका उपयोग सुशासन तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद से निपटने के लिए सहयोग को मजबूत करने में सभी देशों का साझा हित है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का संदर्भ देते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि समुद्री मार्गों में व्यवधान और ऊर्जा अवसंरचना पर खतरे संभावित रूप से पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर, सुरक्षित और अबाधित समुद्री आवागमन सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बैठक में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री, साथ ही सदस्य और सहयोगी देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्ष के सम्मेलन का विषय है—"लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण।" यह विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मानवता सबसे पहले" (Humanity First) के दर्शन और उनके जन-केंद्रित दृष्टिकोण से प्रेरित है।

विशेष सत्र में भाग लेंगे सदस्य

इस बैठक में शामिल होने वालों में ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो, मलेशिया के विदेश मंत्री दातो सेरी उतामा मोहम्मद बिन हाजी हसन, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हैं। शुक्रवार को इस कार्यक्रम का दूसरा दिन है, इस दिन ब्रिक्स संगठन के सदस्य और सहयोगी देश "ब्रिक्स @ 20: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण" शीर्षक वाले एक विशेष सत्र में भाग लेंगे। इसके बाद वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली के भीतर सुधारों पर चर्चा होगी।

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