India Digital Power: पिछले 12 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में जो परिवर्तन देखा है, वह केवल तकनीकी विकास की कहानी नहीं बल्कि एक नई डिजिटल क्रांति का प्रतीक बन चुका है। एक समय केवल बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार के रूप में पहचाना जाने वाला भारत आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में वैश्विक पहचान बना रहा है। सरकार द्वारा जारी ताजा फैक्ट शीट के अनुसार डिजिटल इंडिया अभियान, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचारों ने भारत को दुनिया की अग्रणी डिजिटल शक्तियों की कतार में खड़ा कर दिया है।
साल 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देश में डिजिटल परिवर्तन की मजबूत नींव रखी। सरकार ने तकनीकी बुनियादी ढांचे, अनुसंधान, स्टार्टअप्स और कौशल विकास पर लगातार निवेश किया, जिसका परिणाम आज एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में दिखाई दे रहा है। देशभर में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ और हाई-स्पीड इंटरनेट गांवों तक पहुंचा। वर्ष 2019 में जहां देश में 19.35 लाख रूट किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर तक पहुंच गया। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाओं की पहुंच आसान हुई है।

भारत ने 5जी नेटवर्क विस्तार के मामले में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में देश के लगभग 99.9 प्रतिशत जिलों तक 5जी सेवाएं पहुंच चुकी हैं। बेहतर नेटवर्क और इंटरनेट उपलब्धता ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुंच गई है। इसी तरह ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी 6.1 करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 99.56 करोड़ हो गए हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं का लाभ करोड़ों लोगों तक पहुंचा है।
भारत में इंटरनेट क्रांति का सबसे बड़ा आधार सस्ता डेटा रहा है। वर्ष 2014 में 1 जीबी डेटा की औसत कीमत 269 रुपये थी, जो अब घटकर केवल 8 से 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है। कम कीमत और बेहतर कनेक्टिविटी का असर डेटा खपत पर भी दिखाई दिया है। प्रति व्यक्ति मासिक डेटा उपयोग 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी तक पहुंच गया है। इससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और स्टार्टअप संस्कृति को व्यापक बढ़ावा मिला है।
भारत ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। लगभग 4,500 करोड़ रुपये के इस मिशन के अंतर्गत देशभर के प्रमुख संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं। इनकी संयुक्त क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है, जो उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि स्वदेशी ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर श्रृंखला का विकास है। यह उपलब्धि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान करती है।

दुनिया भर में चिप्स की बढ़ती मांग के बीच भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण में भी बड़ा कदम उठाया है। दिसंबर 2021 में शुरू किए गए 76,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा के बाद इस क्षेत्र में निवेश और तेज हुआ है। जून 2026 तक लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये की 12 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं से आयात निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सकेगा।
सरकार ने अप्रैल 2023 में 6,003.65 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की शुरुआत की थी। यह मिशन क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसर और क्वांटम उपकरणों के विकास पर केंद्रित है। देश के प्रमुख संस्थानों में चार विशेष क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां 150 से अधिक शोधकर्ता कार्यरत हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबे सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क का सफल प्रदर्शन भी किया है, जो निर्धारित लक्ष्य से कई वर्ष पहले हासिल की गई उपलब्धि मानी जा रही है। फऱरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली ‘क्वांटम वैली’ की आधारशिला रखी गई, जो भविष्य में अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में शामिल है और भारत इस क्षेत्र में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सरकार ने 2024 में 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ इंडिया AI मिशन शुरू किया था। मार्च 2026 तक देश में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें करीब 89 प्रतिशत किसी न किसी रूप में AI तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। AI मिशन के तहत 38,000 से अधिक GPU क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है। वहीं ‘AI कोश’ प्लेटफॉर्म पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 AI मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं।
क्लाउड कंप्यूटिंग और AI सेवाओं की बढ़ती मांग ने भारत के डेटा सेंटर उद्योग को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। वर्ष 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक बढ़कर 1,500 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे शहर प्रमुख डेटा सेंटर हब बनकर उभर रहे हैं। इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में कई बड़े हाइपरस्केल और AI-केंद्रित डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं।
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