Iran-Israel war: 19 मिनट में क्या-क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति, साफ हुआ युद्ध का भविष्य
खबर सार :-
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं और कई बड़े दावे पेश किए। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर निशाना साधा। इतना ही नहीं उन्होंने नाटो देशों को कागजी शेर कहते हुए निशाना साधा।
खबर विस्तार : -
वॉशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को लेकर एक सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में हमले और तेज किए जाएंगे। स्थानीय समयानुसार बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और अगले दो से तीन हफ्तों में अमेरिका ईरान पर और भी जोरदार हमले करेगा।
अमेरिका ने खत्म किया सबसे बड़ा खतराः ट्रंप
अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि यह सैन्य अभियान अब तक बेहद सफल रहा है और अमेरिका ने अपने प्रमुख लक्ष्यों को लगभग हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन एक महीने से कुछ ज्यादा समय से चल रहा है, लेकिन इस दौरान अमेरिका ने उस खतरे को खत्म कर दिया है जिसे पहले बहुत बड़ा बताया जा रहा था। ट्रंप के अनुसार, “हम इस सैन्य ऑपरेशन में 32 दिनों से हैं और ईरान को लगभग पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है। अब वह पहले जैसा खतरा नहीं रहा।”
राष्ट्रपति ने इस अभियान की तुलना अमेरिका के पिछले युद्धों से करते हुए इसकी गति और प्रभावशीलता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध में अमेरिका की भागीदारी एक साल से अधिक समय तक चली, द्वितीय विश्व युद्ध लगभग चार साल चला, जबकि वियतनाम और इराक युद्ध तो कई वर्षों तक चले। इसके विपरीत, ईरान के खिलाफ यह अभियान कुछ ही हफ्तों में निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
ईरान की सैन्य क्षमता को किया नष्टः ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि आधुनिक युद्ध के इतिहास में शायद ही कभी किसी दुश्मन को इतने कम समय में इतना व्यापक और गंभीर नुकसान पहुंचाया गया हो। उन्होंने अमेरिकी सेना की तारीफ करते हुए कहा कि उसकी रणनीतिक स्पष्टता और ताकत ने इस तेज सफलता को संभव बनाया है। उनके अनुसार, यह अभियान न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है बल्कि अमेरिका की निर्णायक नीति का भी उदाहरण है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना अब प्रभावी नहीं रही, वायुसेना कमजोर हो चुकी है और उसके मिसाइल भंडार को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है और पुराना कठोर नेतृत्व काफी हद तक हट चुका है। उनकी जगह एक अपेक्षाकृत कम कट्टरपंथी समूह ने ले ली है।
ट्रंप ने इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना बताया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है और अब ईरान परमाणु बम नहीं बना पाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार नहीं किया कि पिछले वर्ष अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के कुछ आकलनों में कहा गया था कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में सक्रिय नहीं है।
पाषाण युग में वापस भेजने की धमकी
अपने संबोधन में ट्रंप ने मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों का भी जिक्र किया और उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस्राइल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन जैसे देशों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इन सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिका की प्राथमिकता है।
हालांकि, ट्रंप के भाषण का सबसे सख्त हिस्सा उनकी चेतावनी थी, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की बात कही। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका ईरान को “पाषाण युग में वापस भेज सकता है।”
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिका के सभी उद्देश्य पूरी तरह पूरे नहीं हो जाते। उन्होंने विश्वास जताया कि अमेरिका जल्द ही अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेगा और इस संघर्ष का अंत निकट है। उनके अनुसार, “जंग लगभग जीत ली गई है और अब हम अंतिम चरण में हैं।”
नाटो का बताया कागजी शेर
अपने भाषण में ट्रंप ने वैश्विक जिम्मेदारियों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर कहा कि इसे खुला रखना केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को भी इसमें भूमिका निभानी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नाटो सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें “कागजी शेर” करार दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह वैश्विक सुरक्षा ढांचे में अमेरिका की भूमिका को लेकर असंतुष्ट हैं।
बराक ओबामा पर कसा तंज
ट्रंप ने इस पूरे अभियान को अमेरिका के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा, “यह आपके बच्चों और नाती-पोतों के सुरक्षित भविष्य में एक निवेश है।” राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती बराक ओबामा पर तंज कसा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "उन्होंने ईरान के संबंध में एक गलती की।" ओबामा प्रशासन के दौरान संपन्न हुई ईरान परमाणु संधि का स्पष्ट रूप से ज़िक्र किए बिना, ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि वह एक गलती थी।
बता दें कि ट्रंप का यह संबोधन आक्रामक रणनीति, सैन्य सफलता के दावों और कड़े संदेशों से भरा हुआ था। जहां एक ओर उन्होंने ईरान के खिलाफ निर्णायक बढ़त का दावा किया, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका और भी कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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