झांसीः झांसी में सोमवार 4 मई को जिलाधिकारी गौरांग राठी ने जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। उनके अचानक पहुंचने से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और स्टाफ में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान नेत्र रोग विभाग में इलाज कराने आए कई मरीजों ने शिकायत की कि उन्हें अस्पताल के बजाय बाहर की दवाइयां लिखी जा रही हैं। जिलाधिकारी ने मरीजों द्वारा दिखाए गए पर्चों की जांच की और संबंधित अधिकारियों को इस पर ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध दवाइयां ही प्राथमिकता से दी जानी चाहिए।
इसके बाद जिलाधिकारी ने इंटीग्रेटेड पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण किया।
उन्होंने रजिस्ट्रेशन काउंटर से मरीजों की क्रमवार सूची मंगाई और उसी क्रम में जांच रिपोर्ट मिलने की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने छाया और जुगल नामक मरीजों से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि उन्हें समय पर रिपोर्ट मिल गई और उनसे किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया।
जिलाधिकारी ने बाबूलाल नामक एक अन्य मरीज से फोन पर बातचीत कर जानकारी ली। बाबूलाल ने बताया कि उनसे भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं मांगा गया और वे अगले दिन अपनी रिपोर्ट लेने आएंगे। इस पर जिलाधिकारी ने संतोष जताया, लेकिन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए।
औचक निरीक्षण के दौरान सीटी स्कैन कक्ष का भी जायजा लिया गया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि उस दिन 54 मरीजों का पंजीकरण किया गया है और रिपोर्ट सामान्यतः एक घंटे के भीतर तैयार हो जाती है। जिलाधिकारी ने मरीज नीलेश राय से भी बातचीत की, जिन्होंने बताया कि उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन रिपोर्ट अगले दिन लेने को कहा गया है।
इस पर जिलाधिकारी गौरांग राठी ने नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने निर्देश दिए कि जब रिपोर्ट एक घंटे में तैयार हो जाती है, तो मरीजों को उसी दिन रिपोर्ट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पंजीकरण और रिपोर्ट वितरण की व्यवस्था अलग-अलग की जाए ताकि मरीजों को अनावश्यक परेशानी न हो और उपचार में देरी न हो।
निरीक्षण के दौरान पार्किंग की समस्या भी सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि नगर निगम की टीम अस्पताल प्रशासन के साथ मिलकर रोड साइड पार्किंग की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को सुविधा मिल सके।
कुल मिलाकर निरीक्षण में अन्य व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, लेकिन कुछ बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता जताई गई। इस मौके पर जॉइंट मजिस्ट्रेट आयुष सैनी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्साधीक्षक सहित कई चिकित्सक और अस्पताल स्टाफ मौजूद रहे।
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