झांसी: जनपद में संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी गौरांग राठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट के नवीन भवन सभागार में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है, इसलिए जनपद की सभी 40 बाढ़ चौकियों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक बाढ़ चौकी पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात रहे और बरसात के मौसम में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए पर्याप्त दवाओं का इंतजाम किया जाए। विशेष रूप से सर्पदंश की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एंटीवेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में पशुधन सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि बाढ़ के दौरान पशुओं के लिए चारे की कोई कमी न हो, इसके लिए भूसा भंडारण की अग्रिम व्यवस्था की जाए। साथ ही बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव हेतु पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
इसके अतिरिक्त सभी उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, नोडल अधिकारियों एवं बाढ़ चौकी प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि वे बांधों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखें। साथ ही नावों और नाविकों की सूची, उनके मोबाइल नंबर, स्कूलों में तैनात रसोइयों, सफाईकर्मियों, रोजगार सेवकों एवं ग्राम स्तर के अन्य कर्मचारियों की अद्यतन सूची तैयार रखें, ताकि आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता ली जा सके।
बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता बेतवा प्रखंड ने जनपद में बाढ़ नियंत्रण एवं अनुश्रवण की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झांसी की प्रमुख नदियों में बेतवा, पहूंज, सुखनई, धसान और लखेरी शामिल हैं। चूंकि यह क्षेत्र पठारी है, इसलिए यहां जलभराव की स्थिति लंबे समय तक नहीं रहती। सामान्यतः बाढ़ का प्रभाव 2 से 3 दिनों तक रहता है, जिसके बाद पानी तेजी से बहकर निकल जाता है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनपद में कुल 40 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए 41 नाविकों को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा बुंदेलखंड बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना बेतवा भवन परिसर में कर दी गई है, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नियंत्रण कक्ष का संपर्क नंबर भी जारी किया गया है ताकि आपात स्थिति में आमजन सहायता प्राप्त कर सकें। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियों को मजबूत बनाने का भरोसा दिलाया।
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