Azam Khan Released : उत्तर प्रदेश की सियासत के कद्दावर चेहरे और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य व वरिष्ठ नेता आज़म खां को लगभग दो साल बाद जेल से रिहाई मिल गई है। सीतापुर जिला कारागार से आज मंगलवार दोपहर करीब 12ः15 बजे जैसे ही आजम खां बाहर आए, वहां मौजूद उनके समर्थकों की आंखों में राहत और चेहरे पर खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।
104 मुकदमों से घिरे आजम खां को रिहा कराने के लिए बीते कुछ महीनों से लगातार कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही थी, जो अब अंततः रंग ले आई है।
आजम खां की रिहाई की राह इतनी भी आसान नहीं थी। रामपुर से जुड़े क्वालिटी बार प्रकरण सहित कुल 104 मुकदमें उनके खिलाफ दर्ज थे, जिनमें 72 मामलों में जमानत के आदेश जारी हो गए। इनमें से 19 मुकदमों की सुनवाई एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में हुई, जबकि बाकी मामलों में पहले ही रिहाई मिल चुकी थी। डूंगरपुर प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद उनके खिलाफ लंबित मुकदमों की स्थिति धीरे-धीरे साफ होती गई। सोमवार को लूट, डकैती और धोखाधड़ी से जुड़े 19 मामलों में भी रिहाई के आदेश आ गए। इसी के बाद सीतापुर जेल प्रशासन को आधिकारिक मेल भेजा गया।
रामपुर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में तीन हजार रुपये के दो जुर्माने जमा करने के बाद जेल प्रशासन को रिहाई का आदेश ई-मेल के जरिए प्राप्त हुआ। हालांकि प्रक्रिया के दौरान रिलीज बॉन्ड में पते की त्रुटि के कारण कुछ देरी जरूर हुई, लेकिन जल्द ही सुधार कर लिया गया और रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
रिहाई की खबर जैसे ही फैली, मंगलवार सुबह 5 बजे से ही समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल वर्मा, छात्रसभा कार्यकर्ता और सैकड़ों समर्थक सीतापुर जेल के बाहर अपने नेता को देखने व उनके स्वागत में जुटने लगे। भीड़ को देखते हुए एएसपी उत्तरी आलोक सिंह की अगुवाई में शहर कोतवाली, रामकोट, खैराबाद, बिसवां और सकरन थानों से भारी पुलिस बल बुलाया गया। समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा आजम खां को रिसीव करने के लिए अपने काफिले के साथ जेल की ओर रवाना हुईं, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। वहीं आज़म के बेटे अदीब सुबह करीब 7ः15 बजे जेल पहुंचे, लेकिन मीडिया से बातचीत किए बिना करीब 15 मिनट बाद वहां से लौट गए।
आजम खां की रिहाई के बाद सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह अब भी सपा के साथ बने रहेंगे या कोई नया सियासी रास्ता चुनेंगे। इस पर सांसद रुचि वीरा का कहना है कि हमारी अगली रणनीति आजम साहब के निर्देश पर तय होगी। अभी वो परिवार से मिलें, फिर कोई निर्णय लिया जाएगा। बसपा में जाने की अटकलों पर अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी। आजम खां की कानूनी मुश्किलों की सबसे बड़ी वजह 2013 का क्वालिटी बार प्रकरण रहा। आरोप है कि मंत्री रहते हुए उन्होंने रामपुर के सिविल लाइंस स्थित एक बार की जमीन को अवैध रूप से अपनी पत्नी तांज़ीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आज़म के नाम करा लिया। 2019 में एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला लंबा खिंचा और 2024 में उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया। इस केस में भी उन्हें अंततः हाईकोर्ट से राहत मिली।
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