Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन सूरत के 400 साल पुराने अंबाजी मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब
खबर सार :-
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्त सुबह 4:00 बजे से ही दर्शन के लिए आने लगे थे। सुबह से ही पूरा गोपीपुरा इलाका "जय माता दी"
खबर विस्तार : -
Sharadiya Navratri 2026: शरादीय नवरात्रि का महापर्व आज रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। इस पवित्र अवसर पर देश भर के देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों भारी भीड़ देखने को मिल रही है। वहीं नवरात्रि के पहले दिन सूरत के ऐतिहासिक गोपीपुरा इलाके में स्थित प्राचीन अंबाजी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह 4:00 बजे से ही मंदिर परिसर में देवी अंबा का आशीर्वाद लेने और पूजा-अर्चना करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। हजारों भक्तों ने देवी की सुबह की 'मंगला आरती' में भाग लिया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
400 साल पुराना प्राचीन मंदिर
बता दें कि सूरत के लोगों की इस प्राचीन मंदिर में अटूट आस्था है, जो लगभग 400 साल पुराना है। इस प्राचीन मंदिर का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है। माना जाता है कि उस कालखंड मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी मां अंबा का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर आए थे। जो इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
मंदिर के पुजारी जितेंद्र भारती गोस्वामी कहते हैं, "मैं पिछले 60 वर्षों से अंबाजी मंदिर में सेवा कर रहा हूँ। यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है। शिवाजी महाराज ने भी इस स्थान का दौरा किया था; वे यहाँ दर्शन (पूजा) के लिए आते थे। महात्मा गांधी ने भी इस मंदिर का दौरा किया था।" मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि सभी भक्त आसानी से माता के दर्शन कर सकें।
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भक्तों में जबरदस्त उत्साह
नवरात्रि के पहले दिन देवी के मंदिर में आए भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। भक्त सुबह 4:00 बजे से ही दर्शन के लिए आने लगे थे। सुबह से ही पूरा गोपीपुरा इलाका "जय माता दी" के जयकारों से गूंज रहा है। भक्तों का कहना है कि इस पवित्र मंदिर में आने से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
मंदिर में दर्शन करने आए एक भक्त ने बताया कि "मैं पिछले एक साल से अंबाजी मंदिर आ रहा हूं। मैं नवरात्रि का व्रत रखता हूं और पिछले 7-8 सालों से माता रानी की पूजा कर रहा हूं। हमने यहां अंबाजी मंदिर में आरती में हिस्सा लिया; आरती में शामिल होने से हमें बहुत शांति मिलती है।"
मंदिर में दर्शन के लिए आईं महिला भक्त ने कहा कि माता रानी के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अंबाजी मंदिर में देवी के दर्शन मात्र से ही उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं, क्योंकि वहां का माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है। यहां पहुंचने पर लोग पूरी तरह से भक्ति में लीन हो जाते हैं।
मां चामुंडा मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
नवरात्रि के पहले दिन जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में स्थित मां चामुंडा के मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। सुबह से ही दूर-दूर से देवी का आशीर्वाद लेने आए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। पूरा मेहरानगढ़ परिसर देवी मां के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा।
नवरात्रि के पहले दिन, जब देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है, मेहरानगढ़ स्थित मां चामुंडा मंदिर के दरवाजे आम जनता के लिए खोल दिए गए। जोधपुर शहर, आसपास के ग्रामीण इलाकों और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में भक्त देवी का आशीर्वाद लेने पहुंचे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी उम्र के लोगों में देवी के दर्शन के लिए भारी उत्साह देखा गया।
मां चामुंडा का चमत्कार
इतिहासकारों के अनुसार, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा, मां चामुंडा की इस दिव्य मूर्ति को मंडोर से लाए थे और विक्रम संवत 1517 (लगभग 563 साल पहले) में इसे मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया था। मारवाड़ के शाही परिवार और आम जनता की देवी चामुंडा में अटूट आस्था है। मंदिर से जुड़े लोगों का मानना है कि इतिहास में संकट के समय खासकर जब दुश्मन सेनाओं ने बम गिराए थे। देवी के आशीर्वाद से एक भी बम नहीं फटा और कोई नुकसान नहीं हुआ; इस चमत्कार ने भक्तों की आस्था को और गहरा कर दिया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि देवी ने हर संकट के समय जोधपुर की रक्षा की है।
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