हिंदू धर्म के 5 प्रमुख पावन स्नान पर्व : इस दिन पवित्र नदियों में स्नान से मिलती है पापों से मुक्ति और होती है पुण्य की प्राप्ति
खबर सार :-
हिंदू धर्म में स्नान का बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। खासकर प्रमुख स्नान पर्व पर गंगा, यमुना व अन्य पवित्र नदियों में स्नान को पापों से मुक्ति व पुण्य प्राप्ति का साधन बताया गया है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघ पुर्णिमा, गंगा दशहरा और कार्तिक पुर्णिमा, ये पांच प्रमुख स्नान पर्व हैं। इन दिनों पर किया गया स्नान जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली : हिंदू धर्म में स्नान का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। खासकर गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में किए जाने वाले स्नान को पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति का साधन बताया गया है। हर साल मकर संक्रांति से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक कुछ ऐसे विशेष स्नान पर्व आते हैं, जिनका इंतजार करोड़ों श्रद्धालु करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों किया गया स्नान जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।
मकर राशि में प्रवेश करते हैं सूर्य देव, उत्तरायण की होती है शुरुआत
इन पवित्र स्नानों की शुरुआत मकर संक्रांति से होती है, जो वर्ष 2026 में 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।
पापों से मुक्त करता है मौनी अमावस्या के दिन किया गया स्नान
इसके बाद आती है मौनी अमावस्या, जो 18 जनवरी को पड़ेगी। माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा का जल अमृत के समान हो जाता है। श्रद्धालु इस दिन मौन रखकर गंगा स्नान करते हैं। कहा जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन किया गया स्नान व्यक्ति को पापों से मुक्त करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है।
अत्यंत पुण्यदायी है माघ पूर्णिमा का स्नान
तीसरा प्रमुख स्नान पर्व है माघ पूर्णिमा, जो 1 फरवरी को मनाई जाएगी। माघ पूर्णिमा का स्नान सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन स्नान के साथ-साथ तिल, अन्न, वस्त्र, घी और कंबल का दान करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों से मिलती है मुक्ति
इसके बाद गंगा दशहरा आता है, जो 25 मई को मनाया जाएगा। यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन पूजा, दान और गंगा आरती का विशेष महत्व होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान से होती है आत्मिक शुद्धि
वर्ष का अंतिम प्रमुख स्नान पर्व है कार्तिक पूर्णिमा, जो 24 नवंबर को पड़ेगी। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि होती है। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है और दीपदान को बहुत शुभ माना जाता है।
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