Mahashivratri 2026 विशेष: शिव-पार्वती विवाह की अलौकिक कथा, जिसने सृष्टि को दिया संतुलन और भक्ति का संदेश
खबर सार :-
महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का पावन पर्व है। भूत-प्रेतों के संग निकली महादेव की अलौकिक बारात और पृथ्वी के संतुलन की कथा जीवन में धैर्य, विश्वास और संतुलन का संदेश देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम बाहरी रूप से नहीं, बल्कि आत्मिक आस्था और समर्पण से परिपूर्ण होता है।
खबर विस्तार : -
Mahashivratri 2026: देवाधिदेव भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित पावन पर्व महाशिवरात्रि देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व शिव और शक्ति के दिव्य मिलन की स्मृति का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने वैदिक विधि से माता पार्वती के साथ विवाह किया था। पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर श्री रामचरितमानस के बालकांड और शिव महापुराण की रुद्र संहिता में इस विवाह का अत्यंत विस्तृत और रोचक वर्णन मिलता है।
अद्भुत दूल्हा, अलौकिक बारात
जब विवाह का समय आया, तब स्वयं महादेव अपने अनोखे और विरक्त स्वरूप में बारात लेकर निकले। उनके शरीर पर भस्म रमी थी, गले में सर्प लिपटे थे, नरमुंडों की माला सुशोभित थी। एक हाथ में डमरू, दूसरे में त्रिशूल और वाहन के रूप में नंदी पर सवार होकर वे हिमालय की ओर प्रस्थान कर गए। यह बारात साधारण नहीं थी। देवताओं के साथ यक्ष, गंधर्व, अप्सराएं, किन्नर, शिवगण, भूत, प्रेत और पिशाच भी सम्मिलित थे। शिवगणों का स्वरूप अत्यंत विचित्र था—किसी के अनेक मुख, किसी के चार नेत्र, किसी के कई हाथ-पैर, तो कोई बिना अंगों के ही दिखाई देता था। कोई अत्यंत विशालकाय था तो कोई दुबला-पतला। सांप-बिच्छू और विभिन्न पशु भी बारात का हिस्सा बने। यह दृश्य देखकर माता पार्वती के परिजन स्तब्ध रह गए। नगरवासियों में भय का माहौल व्याप्त हो गया।

जब झुक गई पृथ्वी
धर्मशास्त्रों के अनुसार, महादेव की यह विराट बारात इतनी विशाल थी कि पृथ्वी अपनी धुरी से झुक गई। सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा। तब स्वयं बाबा विश्वनाथ ने महर्षि अगस्त्य को दक्षिण दिशा की ओर जाने का आदेश दिया। महर्षि अगस्त्य दक्षिण में जाकर तपस्या में लीन हुए और अपने तपोबल से पृथ्वी का संतुलन पुनः स्थापित किया। इस घटना का प्रतीकात्मक अर्थ यह भी माना जाता है कि जब जीवन में असंतुलन उत्पन्न हो, तो तप, धैर्य और ज्ञान से उसे संतुलित किया जा सकता है।
मैनावती हुईं मूर्छित
जब बारात हिमालय पहुंची, तब ब्रह्मा और विष्णु सहित सभी देवता अग्रिम पंक्ति में थे। माता पार्वती की माता मैनावती ने परंपरा के अनुसार बारात का स्वागत किया, लेकिन जैसे ही उनकी दृष्टि शिवजी के उग्र और भस्म-विभूषित रूप पर पड़ी, वे भयभीत होकर मूर्छित हो गईं। नगर की महिलाएं भय से इधर-उधर भागने लगीं। मैनावती ने नारदजी को इस विवाह के लिए दोषी ठहराया। किंतु माता पार्वती का विश्वास अडिग रहा। उन्होंने शिव के इस रूप में भी वही परम सौंदर्य देखा, जो तप, सत्य और त्याग का प्रतीक है। देवताओं के आग्रह पर शिव ने अंततः अपना सौम्य और मनोहर रूप धारण किया और वैदिक विधि से विवाह संपन्न हुआ।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का पर्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और रात्रि जागरण कर “ॐ नमः शिवाय” का जप करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई उपासना जीवन के समस्त कष्टों को दूर करती है और सुख-समृद्धि प्रदान करती है। शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनना और गाना विशेष फलदायी माना गया है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि बाहरी रूप से अधिक महत्वपूर्ण है आंतरिक पवित्रता और अटूट विश्वास।

महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सागर
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के शिवालयों में आस्था का जन-सैलाब उमड़ पड़ा है। गुजरात स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। भक्त घंटों लाइन में खड़े होकर “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ बाबा के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का विशेष माहौल है। महिलाएं महादेव की बारात के पारंपरिक गीत गा रही हैं, जिससे वातावरण शिवमय हो उठा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भारी भीड़ के बावजूद दर्शन की व्यवस्था सुचारु और सुव्यवस्थित है। सुबह की मंगला आरती में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि व्यवस्थाएं अत्यंत संतोषजनक हैं और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने मंदिर प्रशासन और सरकार द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में विशेष अनुष्ठान
गुजरात के द्वारका के समीप स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार शाम तक भीड़ और बढ़ने की संभावना है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और दर्शन की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के गोस्वामी पुजारी गिरधर भारती ने बताया कि महाशिवरात्रि पर मंगला आरती, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक के विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा भी करवा रहे हैं। शाम को पुष्प शृंगार और रात्रि में 16 प्रकार की सामग्रियों से महादेव का भव्य रुद्राभिषेक किया जाएगा।
काशी में भी भक्ति की गूंज
महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। मंदिर प्रशासन के अनुसार दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जलाभिषेक में शामिल होने की संभावना है। पिछले 25 वर्षों से यहां महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा और आयोजन होते आ रहे हैं। देशभर के शिवालयों में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का यह अद्भुत संगम महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व को और भी विशेष बना रहा है।
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